दिल्ली शराब घोटाले मामले में ईडी के समन पर तीसर बार भी पेश नहीं होने के बाद अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ सकती है। आम आदमी पार्टी तो दावा कर रही है कि ईडी गुरुवार को केजरीवाल के ठिकानों पर छापेमारी करेगी और उन्हें गिरफ्तार करेगी। इस बीच, गुरुवार सुबह से ही दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के घर के बाहर हलचल है। वहां पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। मीडिया के लिए अलग से एन्क्लोजर बनाया गया है जो आम दिनों में नहीं होता है। सीएम आवास तक जाने वाले दोनों रास्ते पहले बंद कर दिए गए थे लेकिन बाद में मीडिया को सीएम आवास तक जाने की इजाजत मिल गई। आखिर आम आदमी पार्टी को केजरीवाल की गिरफ्तारी का डर क्यों सता रहा है? झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तो ईडी के एक-दो नहीं बल्कि 7 समन को ठेंगा दिखा चुके हैं लेकिन उनकी अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। केजरीवाल का मामला आखिर सोरेन से कैसे अलग है?
केजरीवाल का ईडी को जवाब
केजरीवाल ने ईडी के समन को राजनीति से प्रेरित और कानून के खिलाफ बताते हुए एजेंसी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया है। ईडी को भेजे जवाब में उन्होंने एजेंसी से पूछा है कि वह स्पष्ट करे कि उन्हें समन एक गवाह के तौर पर भेजा गया है या फिर संदिग्ध के तौर पर। उन्होंने ईडी को लिखे खत में आरोप लगाया है कि उसका समन दुर्भावनापूर्ण है और एजेंसी खुद ही जज, ज्यूरी और एग्जिक्यूशनर की भूमिका निभा रही है। केजरीवाल ने ईडी को कहा है कि वह सवालों की लिस्ट भेज दे, वह उनका जवाब दे देंगे।
केजरीवाल का मामला सोरेन से अलग कैसे?
सूत्रों ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि केजरीवाल का ईडी समन को बार-बार नजरअंदाज करना जांच अधिकारी को उन्हें कस्टडी में लेने के विकल्प देता है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ईडी के 7 समन को नजरअंदाज किया है लेकिन एजेंसी ने अब तक उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। इसकी बड़ी वजह है कि सोरेन के खिलाफ कार्रवाई से संभव है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाए। लेकिन दिल्ली में एजेंसी के सामने ऐसी चिंता नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था सीधे-सीधे केंद्र के अधीन आता है।
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