बीजेपी ने समय-समय पर चुनावी घोषणा पत्रों में समान नागरिक संहिता का जिक्र किया है। बीते कुछ दिनों से एक बार फिर कॉमन सिविल कोड को लेकर चर्चा तेज हो गई है और ऐसी संभावना जताई जा रही है कि केंद्र सरकार जल्द ही देश में फिर कॉमन सिविल कोड लागू करने के लिए संसद में बिल पेश कर सकती है।
समान नागरिक संहिता क्या है
जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि समान नागरिक संहिता का मतलब है कि देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था। भारत जैसे विविधता वाले देश में सभी नागरिकों को अपने-अपने धर्मों के हिसाब से जीने की आजादी है। समान नागरिक संहिता लागू होने जाने के बाद एक समान कानून के साथ ही सभी धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने के नियम भी एक समान हो जाएंगे। फिलहाल देश में हिंदुओं, मुस्लिमों के लिए अलग-अलग कानून व्यवस्था है।
गोवा क्यों बना मिसाल
समान नागरिक संहिता को लेकर देश में भले ही विवाद की स्थिति हो, लेकिन इस मामले में गोवा देश के लिए मिसाल बना हुआ है। गोवा में साल 1965 से ही समान नागरिक कानून लागू है। गोवा में उत्तराधिकार, दहेज और विवाह के संबंध में हिन्दू, मुस्लिम और क्रिश्चियन सभी अन्य धर्मों के लिए पूरे राज्य में एक ही कानून लागू है। वहीं गोवा में यदि कोई मुस्लिम अपनी शादी का पंजीयन कराता है तो उसे बहुविवाह करने की अनुमति नहीं है। गोवा में जन्मा कोई भी व्यक्ति एक से ज्यादा विवाह नहीं कर सकता है। यही कारण है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समान नागरिक संहिता का विरोध कर रहा है। यदि देशभर में कॉमन सिविल कोड लागू हो जाता है तो मुसलमानों को 3 शादियां करने का अधिकार नहीं रहेगा।
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