धार स्थित भोजशाला हमेशा से आस्था, परंपरा और विवाद के केंद्र में रही है। वर्ष 2026 में बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने का संयोग पहले भी 2006, 2013 और 2016 में बना था, जब क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात देखने को मिले थे। इन्हीं अनुभवों के कारण इस बार प्रशासन किसी भी तरह की चूक नहीं चाहता और पहले से ही अलर्ट मोड में है।
संवाद और समन्वय पर विशेष जोर
पुलिस और जिला प्रशासन दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए हैं। उद्देश्य साफ है—स्थिति को नियंत्रण में रखना और किसी भी अफवाह या उकसावे को समय रहते रोकना। प्रशासन का मानना है कि आपसी संवाद ही शांति बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
2000 जवानों का फ्लैग मार्च, ड्रोन से निगरानी
एहतियाती कदम के तौर पर रविवार को लगभग 2000 जवानों ने शहर में फ्लैग मार्च निकाला। भोजशाला और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही करीब एक हजार सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे एक्टिव रखे गए हैं, ताकि हर गतिविधि पर नजर बनी रहे।
बाहर से बुलाया गया अतिरिक्त पुलिस बल
एआईजी कानून-व्यवस्था के निर्देश पर 20 जनवरी को अतिरिक्त पुलिस बल धार पहुंचेगा, जो 27 जनवरी तक तैनात रहेगा। पूरे जिले में 2435 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी फुल सिक्योरिटी प्लान के तहत तैनात किए जा रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय बलों और सीआरपीएफ की भी तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।
अखंड पूजा और नमाज में सहयोग का संदेश
महाराजा भोज स्मृति बसंतोत्सव समिति के सदस्य सुरेश जलोदिया के अनुसार 23 जनवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक भोजशाला में अखंड पूजा का आयोजन किया जाएगा। वहीं, कमाल मौलाना मस्जिद नमाज इंतजामिया कमेटी के सदर जुल्फिकार पठान ने स्पष्ट किया है कि शहर में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए मुस्लिम समाज पूरा सहयोग करेगा।
सुरक्षा के साथ सौहार्द की भी परीक्षा
भोजशाला का यह दिन केवल प्रशासनिक व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द की भी परीक्षा है। प्रशासन का फोकस केवल बल प्रयोग नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद और संयम के जरिए शांति बनाए रखने पर है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि इतिहास से सबक लेकर धार एक सकारात्मक उदाहरण पेश कर पाता है या नहीं।
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