नई दिल्ली में सोमवार सुबह रिक्टर स्केल पर 2.8 तीव्रता का हल्का भूकंप आया, जिससे राष्ट्रीय राजधानी के कुछ हिस्सों में थोड़ी देर झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार, भूकंप सुबह लगभग 8:44 बजे उत्तरी दिल्ली में, 5 किलोमीटर की गहराई पर आया।
किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं
इस भूकंप से किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं मिली। लेकिन इस घटना ने दिल्ली की भौगोलिक स्थिति के कारण भूकंपीय जोखिमों को फिर से उजागर किया। दिल्ली और आसपास का नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) कई सक्रिय फॉल्ट लाइन्स के पास स्थित है, जो टेक्टोनिक प्लेटों के संपर्क और खिसकने की वजह से क्षेत्र को हल्के या मध्यम भूकंपों के लिए संवेदनशील बनाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हल्के झटकों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये राजधानी के संभावित भूकंपीय खतरे की याद दिलाते हैं। भूवैज्ञानिक परिस्थितियाँ इस जोखिम को और बढ़ाती हैं, खासकर यमुना के बाढ़ के मैदानों के पास पूर्वी दिल्ली में, जहां मिट्टी नरम, रेतीली और गाद वाली होती है और भूजल सतह के करीब रहता है।
भूकंप की संभावना के आधार पर छह ज़ोन बनाए गए
भारत के भूकंपीय जोनिंग सिस्टम को 2025 में अपडेट किया गया, जिससे भूकंप की संभावना के आधार पर छह ज़ोन बनाए गए। वैज्ञानिक बताते हैं कि पृथ्वी की सतह मुख्य रूप से सात बड़ी और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है, जो लगातार गति करती रहती हैं और आपस में टकराती हैं। इस टकराव से प्लेट्स के कोने मुड़ सकते हैं और अत्यधिक दबाव के कारण टूट सकते हैं। जमीन के अंदर जमा हुई ऊर्जा जब बाहर आती है, तो भूकंप होता है।
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