नई दिल्ली. केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवें वेतन आयोग की बैठकों का दौर लगातार जारी है। अगली महत्वपूर्ण बैठक 22-Oct. और 23-Oct. को मुंबई में होने वाली है। आयोग का गठन 3-Nov.-2025 को हुआ था और पिछले लगभग 11 महीनों में इसने दिल्ली लद्दाख पश्चिम बंगाल पुडुचेरी सहित देश के विभिन्न हिस्सों में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में विभिन्न कर्मचारी संगठनों और संघों ने बढ़ती महंगाई से जुड़ी अपनी समस्याएं रखीं। उनका आग्रह है कि आयोग इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करे ताकि वर्तमान कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के जीवन स्तर में सुधार हो सके। माना जा रहा है कि आयोग अपनी सिफारिशें अगले वर्ष की पहली छमाही में सरकार को सौंप देगा।
स्थायी वेतन समीक्षा निकाय बनाने की मांग
राष्ट्रीय डाक संगठनों के संघ यानी FNPO ने आठवें वेतन आयोग के समक्ष एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है जिसमें स्थायी वेतन समीक्षा निकाय बनाने की मांग की गई है। इस निकाय को कुछ विशेष परिस्थितियों में नया फिटमेंट फैक्टर सुझाने का अधिकार देने की बात कही गई है। प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि महंगाई बढ़ने पर कर्मचारियों को अगले वेतन आयोग तक लंबे इंतजार की मजबूरी न झेलनी पड़े। स्थायी निकाय के गठन से वेतन और पेंशन में समय पर संशोधन संभव हो सकेगा। कर्मचारी संगठन मानते हैं कि इससे वेतन संरचना अधिक लचीली और वास्तविक महंगाई के अनुरूप बन जाएगी। यह मांग लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
90 दिनों में नया फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव
FNPO के प्रस्ताव के अनुसार जब महंगाई भत्ता यानी DA या महंगाई राहत यानी DR 50 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाए तो स्थायी निकाय को 90 दिनों के भीतर वेतन संशोधन के लिए नया फिटमेंट फैक्टर सुझाना चाहिए। इसके अलावा जब DA या DR 25 प्रतिशत से अधिक हो जाए तो उसे बेसिक सैलरी या पेंशन में विलय कर देने की भी सिफारिश की गई है। इन दोनों प्रावधानों का मकसद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की क्रय शक्ति को महंगाई के प्रभाव से बचाना है। वर्तमान व्यवस्था में अगले वेतन आयोग तक इंतजार करना पड़ता है जिससे वास्तविक आय प्रभावित होती है। 90 दिनों की समय सीमा निर्धारित कर संगठनों ने त्वरित कार्रवाई की मांग को मजबूत किया है।
पेंशनभोगियों की ओर से भी समान मांग
भारत पेंशनर्स समाज ने भी इसी दिशा में अपनी मांगें रखी हैं। संगठन ने कहा है कि जब DR 25 प्रतिशत से अधिक हो जाए तो उसे बेसिक पेंशन में जोड़ने के प्रस्ताव पर विचार किया जाए। इसके साथ ही भारत पेंशनर्स समाज ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव भी रखा है। पेंशनभोगियों का तर्क है कि महंगाई का असर उन पर भी समान रूप से पड़ता है इसलिए समय पर राहत मिलनी चाहिए। दोनों संगठनों की मांगों का मूल उद्देश्य एक ही है कि वेतन और पेंशन की वास्तविक मूल्य को बनाए रखा जाए। आयोग के समक्ष ये प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनमें कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों के हित जुड़े हुए हैं।
मुंबई बैठक और संगठनों की उम्मीदें
दशहरा के ठीक बाद 22 और 23 अक्टूबर को मुंबई में होने वाली बैठक में इन मांगों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। कर्मचारी संगठन इस बैठक को अहम मान रहे हैं क्योंकि इसमें वेतन आयोग के सदस्यों के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। पिछले बैठकों में भी महंगाई से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया था। संगठनों की उम्मीद है कि आयोग इन प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख अपनाएगा। हालांकि यह स्पष्ट है कि फिलहाल ये केवल संगठनों की मांगें हैं और सरकार या आयोग ने इन्हें अभी मंजूरी नहीं दी है। आने वाला समय बताएगा कि इन प्रस्तावों पर कितना अमल होता है।
कर्मचारियों पर संभावित प्रभाव और आगे की राह
यदि स्थायी वेतन समीक्षा निकाय का प्रस्ताव स्वीकार होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई के प्रभाव से बचाने में बड़ी मदद मिलेगी। 90 दिनों में नया फिटमेंट फैक्टर सुझाने की व्यवस्था से वेतन संशोधन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। DA और DR के 25 प्रतिशत स्तर पर विलय से बेसिक वेतन में वृद्धि होगी जिससे भविष्य के भत्तों की गणना भी बेहतर आधार पर होगी। आयोग की सिफारिशें आने के बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी। कर्मचारी संगठन निरंतर इन मुद्दों को उठाते रहेंगे ताकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें उनके हितों के अनुरूप बन सकें। कुल मिलाकर यह मांग वेतन व्यवस्था को अधिक गतिशील और महंगाई के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।