नई दिल्ली. 8वां वेतन आयोग एक अस्थायी तीन सदस्यीय निकाय है जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग में प्रोफेसर पुलक घोष अंशकालिक सदस्य तथा पंकज जैन सदस्य सचिव के रूप में शामिल हैं। इसका गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और टर्म्स ऑफ रेफरेंस के अनुसार आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग का दायरा केवल वेतन संशोधन तक सीमित नहीं है बल्कि भत्ते पेंशन ग्रेच्युटी पेंशन कम्यूटेशन और कर्मचारियों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सिफारिशें देना इसमें शामिल है। कर्मचारी संगठनों तथा अन्य पात्र संस्थाओं के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इस पूरे प्रक्रिया में फिटमेंट फैक्टर सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
फिटमेंट फैक्टर की अवधारणा और पिछले आयोगों का अनुभव
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है जिसके आधार पर मौजूदा वेतनमान को नए वेतनमान में परिवर्तित किया जाता है। यह न्यूनतम बेसिक सैलरी से लेकर पूरे वेतन ढांचे को प्रभावित करता है। छठे वेतन आयोग में 1.86 तथा सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। अब आठवें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठन इससे कहीं अधिक गुणक की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि महंगाई आय वृद्धि और परिवार की न्यूनतम जरूरतों को देखते हुए पुराने गुणक पर्याप्त नहीं हैं। फिटमेंट फैक्टर तय होने से न केवल वर्तमान कर्मचारियों का वेतन बल्कि पेंशनर्स की पेंशन भी सीधे प्रभावित होती है। इसलिए यह आंकड़ा पूरे कर्मचारियों वर्ग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग और 72000 रुपये की संभावना
भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने सबसे अधिक 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है। मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी 18000 रुपये पर इसे लागू करने से गणना 18000 गुणा 4.00 यानी 72000 रुपये बैठती है। संगठन ने इस मांग के समर्थन में 2016-17 से 2024-25 के बीच प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय में हुई वृद्धि को आधार बनाया है। इसके अतिरिक्त मौजूदा वेतन और महंगाई भत्ते के साथ पांच सदस्यीय परिवार की वास्तविक जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो न्यूनतम वेतन स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी। संगठन का मानना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में यही आंकड़ा न्यायसंगत है।
3.833 गुणक पर आधारित लगभग 69000 रुपये का प्रस्ताव
राष्ट्रीय परिषद संयुक्त परामर्श मशीनरी स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है। 18000 रुपये की वर्तमान न्यूनतम बेसिक सैलरी पर इसका गुणनफल लगभग 68994 रुपये आता है जिसे राउंड ऑफ कर लगभग 69000 रुपये माना जा रहा है। राष्ट्रीय परिषद ने पांच सदस्यीय परिवार के भोजन वस्त्र आवास ईंधन शिक्षा और अन्य घरेलू खर्चों को आधार बनाकर यह आंकड़ा तैयार किया है। भारत पेंशनर्स समाज ने 5.2 वेटेज फैमिली यूनिट के आधार पर अलग गणना प्रस्तुत की है। राष्ट्रीय परिषद ने पे मैट्रिक्स के लिए भी प्रस्ताव रखा है जिसमें स्तर एक पर 69000 रुपये तथा उच्च स्तरों पर और अधिक शुरुआती वेतन की सिफारिश की गई है।
3.61 फिटमेंट फैक्टर और 65000 रुपये की न्यूनतम सैलरी का आकलन
सर्वे ऑफ इंडिया की मंत्रालयी कर्मचारी संघ ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। मौजूदा 18000 रुपये पर गणना करने से 18000 गुणा 3.61 यानी लगभग 64980 रुपये आता है जिसे लगभग 65000 रुपये माना जा रहा है। इस मांग का आधार 15वीं भारतीय श्रम सम्मेलन के मानदंड और रेप्टाकोस ब्रेट मामले से जुड़े सिद्धांत बताए गए हैं। इनमें पांच सदस्यीय परिवार की न्यूनतम जरूरतों को विशेष महत्व दिया गया है। संगठन का कहना है कि यह आंकड़ा वैज्ञानिक आधार पर तैयार किया गया है और कर्मचारियों की वास्तविक जीवन लागत को प्रतिबिंबित करता है। अन्य संगठनों की तुलना में यह अपेक्षाकृत संतुलित प्रस्ताव माना जा रहा है।
आयोग की रिपोर्ट की संभावित समयसीमा और निर्णय की प्रक्रिया
8वें वेतन आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने का समय मिला है। अनुमान है कि रिपोर्ट मई जून 2027 के आसपास केंद्र सरकार के समक्ष पहुंच सकती है। रिपोर्ट आने के बाद सरकार आयोग की सिफारिशों पर गहन विचार करेगी और फिटमेंट फैक्टर सहित वेतन तथा पेंशन से जुड़े मुद्दों पर अंतिम निर्णय लेगी। इस प्रक्रिया में कर्मचारी संगठनों के सुझावों के साथ वित्तीय व्यवहार्यता और समग्र आर्थिक प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाएगा। अंतिम फैसला न केवल वर्तमान कर्मचारियों बल्कि भविष्य के पेंशनर्स के लिए भी दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ने वाला साबित होगा। इसलिए सभी पक्ष आयोग की सिफारिशों और सरकार के निर्णय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।