भारतीय सेना ने प्रमोशन की नई पॉलिसी लागू की है। इसमें ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे आर्मी फिट बनेगी। पॉलिसी के तहत सीनियर रैंक (टू स्टार, थ्री स्टार) जनरल में शेप-1 यानी मेडिकली फिट अधिकारी को ही प्रमोशन दिया जाएगा। अब तक स्टाफ पोस्टिंग में प्रमोशन के लिए यह नियम नहीं था, लेकिन अब स्टाफ पोस्टिंग भी पूरी तरह फिट ऑफिसर को ही मिलेगी। साथ ही, आर्मी अलग-अलग कोर्स के वेटेज (नंबर) को लेकर भी बदलाव करने की योजना बना रही है। इस बारे में स्टडी चल रही है। प्रमोशन के लिए कोर्स का वेटेज (नंबर) इस तरह करने की प्लानिंग है कि अफसर कोर्स के पीछे नहीं, एक्सपर्टीज यानी अपनी फील्ड में महारत पर फोकस करें।
बदलेंगे कोर्स के नंबर
सेना में स्टडी चल रही है कि प्रमोशन के लिए अलग-अलग कोर्स के जो नंबर दिए जाते हैं, उन्हें इस तरह बदला जाए कि अधिकारी अपनी फील्ड में महारत हासिल करने पर फोकस करें और इससे जुड़े कोर्स को प्राथमिकता दें। इसे क्वांटिफाइड सिस्टम ऑफ सिलेक्शन कहते हैं। एक अधिकारी ने उदाहरण दिया, जैसे अभी MTech करने पर कम वेटेज है और स्टाफ कॉलेज का ज्यादा वेटेज है, लेकिन अब इस पर फोकस किया जा रहा है कि अधिकारी अपनी फील्ड की एक्सपर्टीज पर जोर दें और उनके प्रमोशन के चांस भी प्रभावित ना हों।
फिट लोग ही बनेंगे मेजर/लेफ्टिनेंट जनरल
नई प्रमोशन पॉलिसी में फिट रहने पर जोर दिया गया है। अगर ऑफिसर पूरी तरह फिट हैं, तभी कर्नल और ब्रिगेडियर रैंक में उन्हें कमांड पोजिशन दी जाएगी। अगर वह शेप-1 यानी एकदम फिट नहीं हैं, तो उन्हें स्टाफ पोस्टिंग ही मिलेगी। अब तक शेप-1 न होने पर भी मेजर जनरल या लेफ्टिनेंट जनरल बन जाया करते थे, लेकिन उन्हें स्टाफ पोस्टिंग ही मिलती थी। नई पॉलिसी में प्रावधान है कि अगर ऑफिसर मेडिकली फिट नहीं हैं, तो उन्हें प्रमोशन ही नहीं मिलेगा यानी वह ब्रिगेडियर से ऊपर प्रमोट नहीं किए जाएंगे।
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