आचार्य श्री ने कहा कि बच्चों को आईपीएस या आईएएस बना दिया लेकिन संस्कारवान नहीं बना पाए तो सब पढ़ाई धरी रह गई। पद और कद के बल पर पैसा कमा सकते हैं, रोटी कमा सकते हैं लेकिन जिंदगी जीना संस्कार से ही आएगा। मेरठ की घटना में सबसे बड़ी भूल माता पिता के संस्कारों की है। किलर, सुसाइडर और लवेरिया के चक्कर में बच्चे पड़ेंगे, जब ऐसे टीवी सीरियल बच्चों को दिखाओगे। रामचरित मानस पढ़ाओगे तो बेटा राम और बेटी सीता बनेगी। रामायण के आधार पर जिंदगी जीना चाहिए।
उसका नाम मुस्कान की जगह शैतान रख दो
रावण वो है जो भाई की संपत्ति हड़पने के लिए भाई को त्याग दे और राम वो है जो भाई को गद्दी पर बैठाने के लिए राज सिंहासन त्याग दे। रामचरित मानस पढ़ाओ बच्चों को तो मेरठ जैसी घटना कहीं नहीं होगी। उसका नाम मुस्कान की जगह शैनात रख दो।
संस्कार होंगे तो जीत लोगे दुनिया
आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिसके अंदर संस्कार होंगे,वह दुनिया जीत सकता है। जीती हुई दुनिया हारी जा सकती है अहंकार से। दुनिया को जीतने का माध्यम संस्कार है। निर्णय कर लो और अपने हृदय के अंदर संस्कार पालो।
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