भूकंप आमतौर पर उन स्थानों पर आते हैं जहां महाद्वीपीय प्लेटों के बीच दरारें होती हैं। इन दरारों पर जब एक टेक्टोनिक प्लेट दूसरी के नीचे धंसती है तो वहां तनाव उत्पन्न होता है, जिसे फॉल्ट स्ट्रेस कहा जाता है। जब यह तनाव अपनी सीमा पार कर जाता है तो प्लेटें अचानक खिसकती हैं और आपस में टकराती हैं जिससे भूकंप उत्पन्न होता है।
शोधकर्ताओं का लंबे समय से मानना था कि यह टेक्टोनिक तनाव ही भूकंप का मुख्य कारण है। हालांकि फॉल्ट ज़ोन में मौजूद चट्टानों के गुण भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चट्टानों की संरचना और उनकी व्यवस्था भूकंप की तीव्रता और प्रभाव को प्रभावित कर सकती है। मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा जापान के एक छोटे से क्षेत्र पर किए गए अध्ययन से यह पता चला है कि फॉल्ट जोन में चट्टानों के गुण भूकंप की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शोधकर्ताओं ने जापान के पूर्वी भाग, के आंकड़ों का विश्लेषण किया। यह क्षेत्र उन जगहों में से एक है जहां फिलीपीन सागर प्लेट, उत्तरी अमेरिकी प्लेट और प्रशांत प्लेट के बीच स्थित है। इस क्षेत्र में आने वाले भूकंप आमतौर पर छोटे होते हैं और 60 से 70 किलोमीटर की गहराई पर उत्पन्न होते हैं। टोक्यो में महसूस किए जाने वाले आधे से अधिक भूकंप इसी क्षेत्र से आते हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि फॉल्ट लाइन के साथ चट्टानों की संरचना अपेक्षाकृत पतली होती है और खनिजों की परतें अलग-अलग स्तरों पर व्यवस्थित रहती हैं।
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