सोने के निवेशकों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी महीनों में सोने के दाम 38% तक गिर सकते हैं। यह गिरावट सोने के बाजार में एक बड़ा परिवर्तन ला सकती है और निवेशकों को चौंका सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के दाम में इस गिरावट का कारण वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में होने वाले बदलाव, केंद्रीय बैंकों की नीति, और अमेरिकी डॉलर की मजबूती हो सकती है। इसके अलावा, यदि वित्तीय बाजारों में सुधार होता है और अन्य निवेश विकल्प बेहतर प्रदर्शन करने लगते हैं, तो सोने के दामों में गिरावट आ सकती है।
भारत में 31 मार्च को 24 कैरेट सोने का भाव 89,510 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यदि इसमें 38% की गिरावट आती है, तो यह घटकर 55,496 रुपये प्रति 10 ग्राम हो सकता है। अमेरिकी वित्तीय सेवा कंपनी, Morningstar के विश्लेषक जॉन मिल्स का कहना है कि सोने की कीमत $1,820 प्रति औंस तक गिर सकती है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 38% कम होगा।
सोने की कीमत में गिरावट के कारण
सोने की बढ़ती सप्लाई: जब सोने की कीमतें अधिक होती हैं, तो खनन कंपनियां अधिक सोना निकालने लगती हैं। 2024 की दूसरी तिमाही में सोने की खनन कंपनियों का औसत मुनाफा $950 प्रति औंस था, जो 2012 के बाद सबसे ज्यादा है। साथ ही, पुराने सोने का भी बड़े पैमाने पर पुनः उपयोग किया जा रहा है, जिससे बाजार में सोने की आपूर्ति बढ़ रही है। अधिक आपूर्ति के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
सोने की डिमांड में कमी: जबकि केंद्रीय बैंक और निवेशक पिछले कुछ सालों से सोने की बड़ी खरीदारी कर रहे थे, यह संभावना नहीं है कि उनकी दिलचस्पी लंबे समय तक बनी रहेगी। 2024 में केंद्रीय बैंकों ने 1,045 टन सोना खरीदा, लेकिन अधिकांश ने यह संकेत दिया है कि वे अगले साल अपनी गोल्ड होल्डिंग्स घटा सकते हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में सोने की मांग कम हो सकती है, जिससे कीमतों पर असर पड़ सकता है। 2024 में सोने के उद्योग में सौदों में 32% का इजाफा हुआ है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि गोल्ड प्राइस अपने शिखर पर हो सकता है।
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