भारतीय रेलवे, जिसे पारंपरिक रूप से एक पुरुष-प्रधान क्षेत्र माना जाता था, अब महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का साक्षी बन रहा है। पिछले दस वर्षों में महिला लोको पायलटों की संख्या में पाँच गुना वृद्धि हुई है, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। 2014 में जहां केवल 371 महिला लोको पायलट रेलवे में थीं, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 1,828 हो गई है।
रेलवे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
महिला लोको पायलटों की संख्या में वृद्धि के अलावा, रेलवे के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। वे अब स्टेशन मास्टर, ट्रैकमैन, सिग्नल मेंटेनेंस, गार्ड और गैंगमैन जैसी भूमिकाओं में सक्रिय रूप से शामिल हो रही हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में रेलवे में कुल महिला कर्मचारियों की संख्या 1 लाख से अधिक हो चुकी है, जो रेलवे की कुल जनशक्ति का लगभग 8.2 प्रतिशत है।
भारतीय रेलवे में काम करने की परिस्थितियां हमेशा से ही कठिन रही हैं। लंबे कार्य घंटे, चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियां और अकेले काम करने की जिम्मेदारी जैसी बाधाओं के बावजूद, महिलाएं इस क्षेत्र में अपनी जगह बना रही हैं। कई बार रेलवे कर्मचारियों को 40 से 60 घंटे तक लगातार ड्यूटी पर रहना पड़ता है, फिर भी महिलाएं इन चुनौतियों को पार कर रही हैं।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में रेलवे की पहल
भारतीय रेलवे में महिलाओं की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि महिलाओं को कार्यस्थल पर समान अवसर मिल रहे हैं। यह सिर्फ संख्यात्मक वृद्धि नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रही हैं, चाहे वह चुनौतीपूर्ण ही क्यों न हो। रेलवे प्रशासन भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नीतियों में सुधार कर रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।
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