समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव के गौशाला पर दिए गए विवादित बयान को लेकर संत समाज में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। हरिद्वार के साधु-संतों ने अखिलेश यादव के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे सनातन धर्म पर सीधा हमला करार दिया है।दरअसल, कन्नौज में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था कि "बीजेपी वालों को दुर्गंध पसंद है, इसलिए गौशाला बनवा रहे हैं। हमें सुगंध पसंद है, इसलिए इत्र पार्क बनवा रहे हैं। उनके इस बयान के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
अखिलेश यादव से माफी की मांग
हरिद्वार के साधु-संतों ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव इस प्रकार के बयान देकर समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। संत समाज का कहना है कि गौशाला को लेकर इस तरह की टिप्पणी न केवल सनातन धर्म का अपमान है, बल्कि देश की सांस्कृतिक परंपराओं का भी अपमान है।संतों ने कहा कि गौशाला सनातन धर्म का अभिन्न हिस्सा है। यहां बेसहारा और बीमार गायों की सेवा की जाती है, जो मानवता और धर्म दोनों का प्रतीक है। उन्होंने सवाल किया कि क्या धार्मिक आस्थाओं पर हमला कर राजनीति चमकाना उचित है।संत समाज ने इस मुद्दे पर अखिलेश यादव से माफी की मांग करते हुए कहा है कि ऐसे बयान सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाते हैं।अखिलेश यादव के इस बयान को लेकर भाजपा नेताओं ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ताओं ने इसे सनातन धर्म के अपमान की संज्ञा दी और कहा कि गौशालाएं केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।हरिद्वार के संतों ने साफ कहा है कि अगर अखिलेश यादव ने अपना बयान वापस नहीं लिया, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस विवाद के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है और अब सबकी नजरें अखिलेश यादव की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
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