भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को 2 दिवसीय यात्रा पर चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, डोभाल भारत-चीन सीमा प्रश्न पर भारत के विशेष प्रतिनिधि के रूप में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ मंगलवार को महत्वपूर्ण बातचीत करेंगे। यह बैठक दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों के तहत हो रही है। डोभाल की इस यात्रा को भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वांग यी के साथ सीमा विवाद पर होगी विस्तृत चर्चा
अजीत डोभाल और वांग यी विशेष प्रतिनिधि स्तर की सीमा वार्ता प्रक्रिया में अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि दोनों पक्ष अपने शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी सहमति की भावना के अनुरूप सीमा प्रश्न पर गहन संवाद जारी रखेंगे। बातचीत का प्रमुख उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखना होगा। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है और कई दौर की वार्ताओं के बावजूद इसका स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है।
चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मिलेंगे डोभाल
बीजिंग यात्रा के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात करेंगे। इस बैठक को सीमा वार्ता से अलग व्यापक द्विपक्षीय संपर्क के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और चीन के बीच संबंधों में सीमा विवाद एक प्रमुख चुनौती रहा है, लेकिन दोनों देश आर्थिक, क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उच्चस्तरीय बैठकों के माध्यम से संवाद बनाए रखना दोनों पक्षों की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है।
2020 की हिंसक झड़प के बाद लगातार जारी है संवाद
भारत और चीन के सैनिकों के बीच 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था। इसके बाद सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई, जिनका उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े तनाव को कम करना रहा। सीमा पर तनाव के बावजूद दोनों देशों ने विभिन्न स्तरों पर बातचीत का सिलसिला जारी रखा है। मौजूदा बैठक भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें सीमा विवाद के व्यापक समाधान के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।
3,500 किलोमीटर लंबी सीमा बनी है चुनौती
भारत और चीन लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं, जिसके विभिन्न हिस्सों को लेकर दोनों देशों के बीच अलग-अलग दावे हैं। अतीत में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर अपने क्षेत्र में अतिक्रमण या क्षेत्रीय दावों को आगे बढ़ाने के आरोप लगाते रहे हैं। सीमा की स्पष्ट और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य रेखा तय न होने के कारण कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहते हैं। यही कारण है कि विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता को सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक माध्यम माना जाता है।
अरुणाचल प्रदेश से जुड़े दावों के बीच फिर चर्चा में सीमा मुद्दा
इस महीने की शुरुआत में विपक्षी दलों ने भारतीय मीडिया में आई उन खबरों पर चिंता जताई थी, जिनमें जुलाई के अंत में अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने का दावा किया गया था। हालांकि भारत सरकार ने इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया था। इस घटनाक्रम के बाद सीमा सुरक्षा और वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक और रणनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। ऐसे माहौल में डोभाल और वांग यी की बैठक को दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और सीमा पर स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BRICS शिखर सम्मेलन से पहले कूटनीतिक हलचल
डोभाल की चीन यात्रा अगले महीने प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन से पहले हो रही है। नई दिल्ली को उम्मीद है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं, हालांकि उनकी भागीदारी को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यदि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात होती है, तो सीमा पर शांति, द्विपक्षीय संबंधों और भविष्य के सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की संभावना बन सकती है। फिलहाल बीजिंग में होने वाली विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता को भारत-चीन संबंधों में संवाद और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।