असम में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में सत्तारूढ़ दल ने अपना विस्तृत संकल्प पत्र जारी करते हुए जनता के सामने विकास और सशक्तिकरण का व्यापक खाका प्रस्तुत किया है। इस संकल्प पत्र में कुल 31 प्रमुख वादों को शामिल किया गया है, जो राज्य को आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से सुदृढ़ बनाने की दिशा में केंद्रित हैं।
महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का बड़ा ऐलान
संकल्प पत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ‘अरुणोदय’ योजना के तहत दी जाने वाली प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता को बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह करने का वादा किया गया है। यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन स्तर को बेहतर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके साथ ही ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आय सृजन के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
रोजगार सृजन और आर्थिक विकास पर फोकस
संकल्प पत्र में युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का आश्वासन दिया गया है। लगभग दो लाख नए रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे राज्य के युवाओं को स्थायी आजीविका मिल सके। इसके अतिरिक्त राज्य को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उद्योगों के विकास को गति देने की दिशा में भी कई योजनाओं का उल्लेख किया गया है।
समान नागरिक संहिता और कानून व्यवस्था पर जोर
संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता लागू करने का भी वादा किया गया है, हालांकि इसे संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों और आदिवासी समुदायों पर लागू नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही कथित ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कठोर कदम उठाने की बात भी कही गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने के लिए सख्त नीतियां अपनाई जाएंगी।
बाढ़ मुक्त असम का लक्ष्य और बुनियादी ढांचे का विकास
राज्य को बाढ़ की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए भी संकल्प पत्र में विशेष प्रावधान किया गया है। इस दिशा में शुरुआती दो वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश करने की योजना है, जिससे बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके और प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सके। यह पहल राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
‘सबसे चमकीला राज्य’ बनाने का संकल्प
राज्य नेतृत्व ने असम को देश का सबसे विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य केवल सहायता पर निर्भर रहने के बजाय राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। संकल्प पत्र में किए गए वादे इसी व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जो विकास, सुरक्षा और सामाजिक संतुलन को केंद्र में रखता है।