नई दिल्ली. थोक मुद्रास्फीति (WPI) नवंबर में 0.26 प्रतिशत रही. खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी के कारण सात महीने तक शून्य से नीचे बनी रहने के बाद नवंबर में यह तेजी से बढ़ी है. थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल से लगातार शून्य से नीचे बनी थी. अक्टूबर में यह शून्य से 0.52 प्रतिशत नीचे थी. इससे पहले मार्च में थोक महंगाई दर 1.34 फीसदी पर थी.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, ‘‘नवंबर 2023 में मुद्रास्फीति मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं, खनिजों, मशीनरी व उपकरण, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक व ऑप्टिकल उत्पादों, मोटर वाहनों, अन्य परिवहन उपकरणों और अन्य विनिर्माण वस्तुओं आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण सकारात्मक दायरे में रही.’’
खाद्य महंगाई दर
खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति नवंबर में 8.18 प्रतिशत रही, जो अक्टूबर में 2.53 प्रतिशत थी. इस सप्ताह की शुरुआत में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खुदरा या उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में बढ़कर तीन महीने के उच्चस्तर 5.55 प्रतिशत पर पहुंच गयी. भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को स्थिर रखा था। साथ ही नवंबर और दिसंबर में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने के संकेत दिए थे.
गवर्नर ने दिया था संकेत
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल ही में कहा था कि नवंबर और दिसंबर में महंगाई के आंकड़े ऊपर जा सकते हैं. उन्होंने था कि खाने-पीने की चीजों के दाम में हुई वृद्धि इसका कारण हो सकती है. इसके बाद गवर्नर ने 2023-24 के लिए खुदरा महंगाई दर 5.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. आरबीआई ने तीसरी तिमाही के लिए 5.6 फीसदी और चौथी तिमाही के लिए 5.2 फीसदी महंगाई दर का अनुमान जताया है. हालांकि, अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में इसके घटकर 5 फीसदी से नीचे आने की उम्मीद जताई जा रही है.
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