कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अभिषेक बनर्जी ने एक कथित सरकारी सर्कुलर को लेकर राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कर्मचारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने के लिए “पूर्ण प्रतिबंध” जैसा माहौल बनाया जा रहा है।
प्रेस, लेख और मीडिया कार्यक्रमों पर रोक का दावा
अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि सरकारी कर्मचारियों को प्रेस से बात करने, लेख लिखने, मीडिया कार्यक्रमों में हिस्सा लेने और सरकार की आलोचना करने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को केवल वही बोलने की अनुमति दी जा रही है, जो सरकार चाहती है।



“लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश” : अभिषेक
तृणमूल कांग्रेस सांसद ने इस सर्कुलर को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि जब कोई सरकार आलोचना सहन नहीं कर पाती, तब वह असहमति की आवाज़ को दबाने लगती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम प्रशासनिक अनुशासन नहीं, बल्कि “लोकतंत्र का गला घोंटने” की कोशिश है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ा तनाव
इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद राज्य और केंद्र के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है और यह मामला उसी राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बनता दिख रहा है।
सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि, जिस कथित सर्कुलर को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उस पर केंद्र सरकार या संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब सभी की नजर इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।