कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतगणना की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। इसी बीच, भाजपा के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद माणिकतला विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार तापस राय ने मीडिया से बात करते हुए उन तीन मुख्य कारणों का खुलासा किया, जिनकी वजह से उन्हें आयोग के पास आना पड़ा।
तापस राय द्वारा बताए गए 3 महत्वपूर्ण कारण:
1. CAPF की तैनाती पर सवाल: तापस राय ने पूछा कि वर्धमान में सीएपीएफ (CAPF) और जिला पुलिस बाहर क्यों घूम रही थी? उन्होंने सुरक्षा बलों की सक्रियता और तैनाती पर स्पष्टता मांगी।
2. कैजुअल स्टाफ पर रोक: भाजपा ने मांग की है कि पिंगला और दासपुर जैसे संवेदनशील इलाकों में मतगणना के दौरान किसी भी हाल में 'कैजुअल स्टाफ' की तैनाती नहीं की जानी चाहिए। केवल स्थायी और अधिकृत अधिकारियों को ही जिम्मेदारी दी जाए।
3. एजेंटों के बैठने की व्यवस्था: चुनाव आयोग के नियमों का हवाला देते हुए भाजपा ने मांग की है कि राष्ट्रीय दलों के काउंटिंग एजेंटों के लिए मतगणना केंद्रों पर उचित बैठने की व्यवस्था हो। इसकी जिम्मेदारी आरओ (RO), एआरओ (ARO) और ऑब्जर्वर्स को सुनिश्चित करनी होगी।
'फालता' बना सियासत का अखाड़ा
तापस राय ने चर्चा के दौरान फालता विधानसभा क्षेत्र में हुई अनियमितताओं का भी जिक्र किया। बता दें कि फालता में भारी गड़बड़ी के बाद चुनाव आयोग ने वहां की मतगणना स्थगित कर दी है और 21 मई को पुनर्मतदान (Re-polling) की घोषणा की है। इसका परिणाम 24 मई को आएगा।
अभिषेक बनर्जी बनाम अमित मालवीय
फालता में पुनर्मतदान के फैसले के बाद भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने तंज कसते हुए कहा कि "डायमंड हार्बर मॉडल पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।" इस पर पलटवार करते हुए टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "10 बार जन्म लेने के बाद भी कोई डायमंड हार्बर मॉडल को कलंकित नहीं कर सकता।" अभिषेक ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें 'बंगाल विरोधी' करार दिया।गौरतलब है कि 29 अप्रैल को डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के फालता में हुए मतदान के दौरान धांधली के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद आयोग ने यह सख्त कदम उठाया है।