तिरुपति। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) से जुड़े लड्डू प्रसाद मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। सरकार द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया है कि मंदिर में प्रसाद के लिए इस्तेमाल होने वाला करीब 70 लाख किलो घी बिना उचित गुणवत्ता जांच के खरीदा गया। यह मामला न केवल श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, बल्कि खाद्य सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
जरूरी टेस्ट को किया गया नजरअंदाज
रिपोर्ट के मुताबिक, घी की गुणवत्ता जांच के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा अनिवार्य β-सिटोस्टेरॉल टेस्ट को लागू करने का फैसला लिया गया था। लेकिन बाद में इस नियम में ढील दे दी गई और सप्लायर्स को बिना इस टेस्ट के ही घी सप्लाई करने की अनुमति दे दी गई। इस बदलाव के चलते बड़ी मात्रा में घी बिना वैज्ञानिक जांच के खरीदा गया, जिससे मिलावट की आशंका बढ़ गई।
मिलावटी घी और सस्ते टेंडर का खेल
जांच में यह भी सामने आया कि सप्लायर्स ने सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर मिलावटी घी की सप्लाई की। कई कंपनियों ने प्रति किलो 200 रुपये से अधिक की कटौती कर बेहद कम दाम में घी सप्लाई करने की बोली लगाई, जिसे बिना पर्याप्त जांच के स्वीकार कर लिया गया।
सबसे कम बोली (L1) पर अत्यधिक भरोसा करने के कारण ऐसी कंपनियों को भी ठेका मिल गया, जिनकी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता पर सवाल थे।
लैब में उपकरणों की कमी, जांच में देरी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि TTD की लैब में घी की मिलावट जांचने के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं थे। लैब को अपग्रेड करने में करीब तीन साल की देरी हुई, जिससे समय रहते मिलावट की पहचान नहीं हो सकी। कुछ कंपनियों पर आरोप है कि मिलावट की पुष्टि होने के बावजूद उन्हें सप्लाई जारी रखने की अनुमति दी गई, जो सिस्टम की गंभीर चूक को दर्शाता है।
प्रशासनिक लापरवाही बनी बड़ी वजह
जांच समिति ने पूरे मामले के लिए TTD बोर्ड, खरीद समिति के सदस्यों और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि नियमों की अनदेखी, गुणवत्ता जांच में ढिलाई और गलत कंपनियों को लगातार ठेका देने की वजह से यह स्थिति बनी। अधिकारियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण लैब रिपोर्ट्स को नजरअंदाज किया, जिनमें घी में मिलावट की पुष्टि हुई थी।