मुंबई - मुंबई में बढ़ते कचरे और गंदगी के मुद्दे पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए नागरिकों और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। अदालत ने कहा कि स्वच्छ शहर बनाने के लिए केवल सरकारी एजेंसियों के प्रयास काफी नहीं हैं, बल्कि आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
'विदेश में नियमों का पालन, भारत में लापरवाही'
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कई लोग विदेशों में सफाई के नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं और कचरा केवल डस्टबिन में डालते हैं, लेकिन भारत लौटते ही वही लोग सार्वजनिक स्थानों पर बेझिझक कचरा फेंक देते हैं। अदालत ने सवाल उठाया कि यदि नागरिक विदेशों में अनुशासन का पालन कर सकते हैं, तो अपने देश में ऐसा क्यों नहीं करते।
कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड मामले की सुनवाई
यह टिप्पणी कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के आसपास प्रदूषण, दुर्गंध और पर्यावरण संबंधी समस्याओं को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गई। अदालत ने कहा कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को कचरा फेंकने की जगह बना देना एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जिससे शहर की छवि और लोगों के स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ता है।
प्रशासन को सख्ती बरतने के निर्देश
हाई कोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों से कहा कि सफाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। अदालत के अनुसार, प्रत्येक वार्ड की सफाई व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि लोग सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाएं। यदि नियमों का उल्लंघन हो तो संबंधित एजेंसियां आवश्यक कार्रवाई करें।
हेरिटेज स्थलों की सफाई पर भी चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने मुंबई के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों के आसपास फैली गंदगी पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि शहर के प्रतिष्ठित और पर्यटन स्थलों के पास कचरा दिखाई देना अच्छी छवि पेश नहीं करता। विशेष रूप से उन स्थानों पर सफाई व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए, जहां बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक आते हैं।
BMC को एक सप्ताह का समय
अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि तय समय में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत आवश्यक आदेश जारी करने पर विचार करेगी।
नागरिकों से भी निभाने की अपील
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ शहर बनाने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी है। अदालत ने कहा कि यदि लोग स्वयं सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की आदत अपनाएं और कचरा निर्धारित स्थानों पर ही डालें, तो शहर को स्वच्छ और बेहतर बनाया जा सकता है।