सर्दी का सितम जारी है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में शीतलहर चली। अभी दो दिन तक इसके जारी रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं, 14 राज्यों में कोहरे से जनजीवन प्रभावित रहा। ट्रेनों की रफ्तार भी कम रही, जिससे वे घंटों देरी से गंतव्यों पर पहुंचीं। उत्तर भारत के ज्यादातर क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते 8-10 जनवरी के बीच उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में गरज के साथ बारिश की भी संभावना है।
हिमाचल में आज धुंध का यलो अलर्ट
हिमाचल में पश्चिमी विक्षोभ के चलते एक बार फिर मौसम में बदलाव के आसार हैं। सोमवार को पूरे प्रदेश में धुंध का यलो अलर्ट जारी हुआ है। मंगलवार को प्रदेशभर में और बुधवार को मध्य और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान है। 11 और 12 जनवरी को मौसम फिर साफ रहेगा और धूप खिली रहेगी। प्रदेश के मैदानी इलाकों में धुंध और कोहरे के चलते कड़ाके की ठंड पड़ रही है। सुबह-शाम के समय बाजारों में सन्नाटा छाया रह रहा है। प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। बर्फबारी और बारिश न होने से गेहूं, मटर और सेब की फसल को नुकसान हो रहा है, जबकि बागवान नई पौध नहीं रोप पा रहे हैं।
पंजाब-हरियाणा के ज्यादातर शहरों में पारा 10 से नीचे
पंजाब में अमृतसर को भीषण ठंड से राहत नहीं मिली है। बीती रात भी यहां 5.8 डिग्री तापमान रहा। लुधियाना, पटियाला, पठानकोट, बठिंडा, फरीदकोट और गुरदासपुर में भी 6-9 डिग्री सेल्सियस के बीच न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। पंजाब सरकार ने भीषण ठंड को देखते हुए प्रदेश में 10वीं तक के सभी स्कूलों को 14 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया है।
जम्मू और श्रीनगर में सबसे सर्द रात
शीतलहर ने जम्मू को अपनी चपेट में ले लिया है और क्षेत्र में शनिवार की रात सीजन में सबसे ज्यादा ठंड महसूस की गई। न्यूनतम तापमान गिरकर 3.4 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। जम्मू क्षेत्र में बनिहाल शहर में सबसे कम माइनस 2.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। कटड़ा में रात का तापमान 6 डिग्री रहा। श्रीनगर में पहले से ही कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन शनिवार की रात इस सीजन की सबसे ठंडी रात रही और न्यूनतम तापमान माइनस 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ठंड की वजह से लोगों की दैनिक गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं और लोग ठंड से बचने के लिए घरों में दुबके रहने को मजबूर हैं। कड़ाके की ठंड से डल झील पहले ही जम गई है।
Comments (0)