राज्य में करीब 91 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के आरोप के बीच प्रशासन ने बड़ी पहल की है। प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए 19 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक विशेष पैनल बनाई गई है, जो अपील ट्राइब्यूनल में दस्तावेजों की जांच कर रही है और मामलों का निपटारा कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन: कब तक मिल सकता है वोट का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, पहले चरण में मतदान वाले इलाकों के जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं, वे अगर 21 अप्रैल तक ट्राइब्यूनल से मंजूरी हासिल कर लेते हैं, तो मतदान कर सकेंगे। वहीं दूसरे चरण के लिए यह समयसीमा 27 अप्रैल तक तय की गई है।
सीईओ का बयान: नाम फिर से जुड़ेंगे वोटर लिस्ट में
मुख्य चुनाव अधिकारी ने साफ किया कि ट्राइब्यूनल में आने वाले आवेदनों का निपटारा 19 जजों की पैनल द्वारा किया जा रहा है। जिन मामलों में मंजूरी मिल जाएगी, उन मतदाताओं के नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ दिए जाएंगे और वे अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि 9 तारीख तक सूची को अंतिम रूप दिया जा चुका था, लेकिन 21 अप्रैल तक जिन मामलों का समाधान होगा, उन्हें अपडेट कर शामिल किया जाएगा।
कितने मामलों का निपटारा हुआ? अभी आंकड़े नहीं
अब तक कितने नामों को मंजूरी मिली है, इस पर फिलहाल स्पष्ट जानकारी नहीं है। सीईओ मनोज अग्रवाल के अनुसार, अभी डैशबोर्ड तैयार नहीं हुआ है, इसलिए सटीक आंकड़ा बताना संभव नहीं है। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही अपडेट सामने आएगा।
ट्राइब्यूनल पूरी तरह स्वतंत्र, कोई दखल नहीं
सीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्राइब्यूनल स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और यह चुनाव आयोग या सीईओ कार्यालय के सीधे नियंत्रण में नहीं है। ऐसे में जब तक सिस्टम पूरी तरह तैयार नहीं होता, उनके काम में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
अपडेटेड वोटर लिस्ट: 48 घंटे में भी संभव
अगर मतदान से 48 घंटे पहले भी किसी नाम पर फैसला होता है, तो उसे सूची में जोड़ने के लिए तकनीकी समाधान तैयार किया जा रहा है। इसके लिए ‘सेतुबंधन’ जैसे सॉफ्टवेयर की योजना है, जिससे निर्णय होते ही नाम स्वतः सूची में जुड़ते जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया को लागू करना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा।
कैसे जानेंगे ‘रद्द’ मतदाता अपना स्टेटस?
सीईओ के मुताबिक, प्रभावित मतदाता अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क कर जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा आधिकारिक वेबसाइट और बीडीओ कार्यालय में भी अपडेट उपलब्ध रहेगा। यानी मतदाताओं के पास कई माध्यम होंगे, जिनसे वे अपनी स्थिति जान सकेंगे।
ऑनलाइन आवेदन की सुविधा, व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदाता चुनाव आयोग के मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ट्राइब्यूनल में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा जिला मजिस्ट्रेट या उपमंडल अधिकारी के कार्यालय में भी दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं।