नई दिल्ली: CBSE की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और रीवैल्युएशन प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने OSM (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) टेंडर प्रक्रिया को लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और छात्रों की आंसरशीट से जुड़े विवादों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मंत्रालय दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना पर भी विचार कर रहा है।
OSM टेंडर को लेकर बढ़ा विवाद
CBSE ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) का ठेका 5 दिसंबर को हैदराबाद स्थित कंपनी COEMPT Edutech को दिया था। यह फैसला बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने से करीब 74 दिन पहले लिया गया था। इसी टेंडर को लेकर विपक्ष और कई छात्र लगातार सवाल उठा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और इससे किसी विशेष वेंडर को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। हालांकि CBSE अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया सामान्य वित्तीय नियमों और सरकारी खरीद मानकों के अनुरूप पूरी की गई थी।
राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी OSM टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया इस तरह तैयार की गई जिससे एक खास कंपनी को लाभ मिला। राहुल गांधी लगातार CBSE और शिक्षा मंत्रालय को इस मुद्दे पर घेर रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
रीवैल्युएशन पोर्टल पर हैकिंग की आशंका
इस बीच CBSE का रीवैल्युएशन और वेरिफिकेशन पोर्टल सोमवार को पूरे दिन प्रभावित रहा। लाखों छात्र पोर्टल नहीं खुलने से परेशान रहे। बोर्ड की ओर से दिनभर यही जानकारी दी जाती रही कि पोर्टल जल्द शुरू किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पोर्टल पर लगातार अनधिकृत हस्तक्षेप यानी हैकिंग की कोशिशें हो रही थीं। हालांकि मंगलवार को CBSE ने घोषणा की कि 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए वेरिफिकेशन और रीवैल्युएशन पोर्टल फिर से सक्रिय कर दिया गया है, जो 6 जून तक खुला रहेगा।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
CBSE ने 13 मई को 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे जारी किए थे। इसके बाद 19 मई को पोस्ट-रिजल्ट शिकायतों के लिए पोर्टल खोला गया, लेकिन पहले ही दिन तकनीकी समस्याओं के कारण वह ठप हो गया। इसके बाद आंसरशीट की फोटोकॉपी प्राप्त करने की तारीख कई बार बढ़ानी पड़ी। 25 मई को पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर करने के लिए देश के दो IIT संस्थानों से भी मदद ली गई। बावजूद इसके, 1 जून को रीवैल्युएशन पोर्टल फिर से बंद हो गया और छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
छात्रों ने उजागर कीं कथित गड़बड़ियां
रांची के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत और दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव इस पूरे विवाद में प्रमुख नाम बनकर सामने आए हैं। सार्थक ने CBSE के सैकड़ों दस्तावेजों का विश्लेषण कर टेंडर प्रक्रिया में कथित विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। वहीं वेदांत ने अपने अंक और रीवैल्युएशन के दौरान मिली उत्तर पुस्तिका के आधार पर मूल्यांकन में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। बाद में CBSE ने उनके मामले में गलती स्वीकार करते हुए सुधार भी किया था।
COEMPT पर पहले भी लगे थे आरोप
COEMPT Edutech का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है। कंपनी पहले ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी। वर्ष 2019 में तेलंगाना बोर्ड परीक्षा के दौरान डेटा प्रोसेसिंग में कथित गड़बड़ियों को लेकर कंपनी पर सवाल उठे थे। उस समय लाखों छात्रों के परिणामों को लेकर विवाद पैदा हुआ था, जिसके बाद राज्य सरकार को जांच करानी पड़ी थी।
आंदोलन तेज करेगी यूथ कांग्रेस
इंडियन यूथ कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर देशव्यापी आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। संगठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। आंदोलन के तहत मशाल जुलूस, छात्र संपर्क अभियान, प्रदर्शन और घेराव जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महाराष्ट्र, तेलंगाना, असम, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड और अन्य राज्यों में इसे बड़े स्तर पर चलाने की तैयारी की जा रही है।