नई दिल्ली. कांग्रेस संगठन में नए राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर पिछले कुछ दिनों में सवा सौ से अधिक नेताओं के इंटरव्यू लिए गए। इस प्रक्रिया के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने दस जनपथ पर मौजूदा राष्ट्रीय सचिवों से मुलाकात कर उनके कामकाज का विस्तृत हिसाब-किताब लिया। सूत्रों के अनुसार यह समीक्षा पूरी हो चुकी है और अब संगठन में नए चेहरों के शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है। दो हफ्ते पहले ही पार्टी नेतृत्व ने एक महासचिव को छुट्टी दी थी तथा दो महासचिवों के तबादले के साथ तीन नए प्रभारी नियुक्त किए थे। अब राष्ट्रीय सचिवों के स्तर पर बदलाव की बारी है। ये सचिव प्रभारी और प्रभारी महासचिवों के साथ अपने प्रभार वाले राज्यों में पार्टी आलाकमान की आंख और कान बनकर काम करते हैं तथा जमीनी स्तर की जानकारी नियमित रूप से पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते हैं।
मौजूदा सचिवों से पूछे गए व्यावहारिक और कठिन सवाल
समीक्षा बैठक में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मौजूदा सचिवों से संगठन के कामकाज में आने वाली दिक्कतों के बारे में विस्तार से पूछा। उन्होंने यह जानना चाहा कि संबंधित राज्य में वे कितने दिन जाते हैं तथा दौरे के दौरान रात्रि विश्राम कहां करते हैं। नेताओं से यह भी पूछा गया कि उनके ठहरने की व्यवस्था कौन करता है तथा संबंधित राज्य के प्रमुख मुद्दों और मजबूत नेताओं के बारे में वे कितनी गहराई से जानते हैं। राहुल गांधी ने सचिवों को स्पष्ट सलाह दी कि वे अपने प्रभार वाले राज्यों में कम से कम दो हफ्ते का समय अवश्य दें ताकि जमीनी हकीकत का सही आकलन हो सके। प्रियंका गांधी ने विशेष रूप से महिला नेताओं से पूछा कि फील्ड में बतौर महिला उन्हें किन व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह सवाल उनके संगठनिक अनुभव और संवेदनशीलता दोनों को दर्शाता है।
नए सचिवों के चयन की विस्तृत इंटरव्यू प्रक्रिया
नए राष्ट्रीय सचिवों के चयन के लिए चार दिनों में लगभग एक सौ चालीस नेताओं के इंटरव्यू आयोजित किए गए। इस पूरी प्रक्रिया में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे। इंटरव्यू के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने संगठन, विचारधारा तथा पार्टी के कामकाज से जुड़े सहज और कुछ पेचीदा सवाल पूछे। एक समूह से राहुल गांधी ने कांग्रेस सरकार की किसी एक खामी बताने को भी कहा ताकि उम्मीदवारों की स्पष्ट सोच और साहस का आकलन किया जा सके। दस जनपथ पर हुए इन साक्षात्कारों के बाद एक सचिव ने बताया कि प्रियंका गांधी पूरे समय गहरी दिलचस्पी से सवाल पूछ रही थीं। यह प्रक्रिया पार्टी की संगठनात्मक मजबूती बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का प्रयास
अगस्त दो हजार चौबीस में कांग्रेस ने पचहत्तर राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किए थे जिनमें कुछ सहसचिव भी शामिल थे। पिछले दो वर्षों में इनमें से लगभग बीस नेताओं को संगठन या सरकार में अन्य जिम्मेदारियां मिल गईं तथा कुछ को छुट्टी भी दी गई। अब बचे हुए करीब पचपन सचिवों में से कुछ की राष्ट्रीय टीम से विदाई की जाएगी ताकि नए चेहरों के लिए जगह बनाई जा सके। जून में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के सामने इनके कामों की प्रारंभिक समीक्षा हो चुकी थी। अंतिम फैसला लेने से पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने फिर से सबके अनुभव और कामकाज के बारे में विस्तार से पूछा। छंटनी और नई नियुक्तियों में सामाजिक तथा क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की पूरी कोशिश की जाएगी ताकि संगठन हर वर्ग और क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर सके।
दो हजार उनतीस लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत टीम तैयार करने का लक्ष्य
पार्टी का मुख्य उद्देश्य दो हजार उनतीस के लोकसभा चुनाव के लिए एक सक्षम और सक्रिय संगठनात्मक टीम तैयार करना है। नए सचिवों की नियुक्ति के बाद मौजूदा सचिवों में से लगभग आधे लोगों की जगह नए नेताओं को दी जा सकती है। इस प्रक्रिया से पार्टी को उन राज्यों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी जहां संगठनात्मक कमजोरी महसूस की जा रही है। राष्ट्रीय सचिव प्रभारी महासचिवों के साथ मिलकर राज्यों में पार्टी की नीतियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने तथा स्थानीय मुद्दों को आलाकमान तक सही तरीके से प्रस्तुत करने का काम करेंगे। इस बदलाव से कांग्रेस संगठन में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है तथा नेतृत्व इसे आगामी चुनावी चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक मान रहा है।