दिल्ली के ग्रीन पार्क मेन इलाके में स्थित आवास से शनिवार को एक युवा न्यायिक अधिकारी का शव बरामद होने के बाद न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई। 30 वर्षीय जज कड़कड़डूमा न्यायालय में पदस्थ थे। जानकारी के अनुसार उनका शव फ्लैट के बाथरूम में फंदे से लटका मिला। दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को वैकल्पिक रास्ते से अंदर प्रवेश करना पड़ा।
दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंची पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और भवन सुरक्षा कर्मियों ने यूटिलिटी शाफ्ट के जरिए दूसरी मंजिल तक पहुंचकर खिड़की तोड़ी और फ्लैट के भीतर प्रवेश किया। इसके बाद न्यायिक अधिकारी को तुरंत सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और जांच शुरू कर दी गई।
पारिवारिक तनाव को बताया जा रहा संभावित कारण
हालांकि पुलिस ने अभी तक आत्महत्या के कारणों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन मृतक के एक रिश्तेदार ने दावा किया कि बीते कुछ समय से उनकी पत्नी के साथ घरेलू विवाद चल रहा था। रिश्तेदार के अनुसार न्यायिक अधिकारी मानसिक रूप से काफी परेशान थे और इसी तनाव के चलते उन्होंने यह कदम उठाया हो सकता है।
पिता को किया था परेशान होने का फोन
जानकारी के अनुसार घटना से एक दिन पहले जज ने अपने पिता को फोन कर मानसिक परेशानी की जानकारी दी थी। इसके बाद उनके पिता राजस्थान के अलवर से दिल्ली पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने पुलिस को दंपती के बीच करीब दो महीने से घरेलू मतभेद होने की बात कही है। घटना के समय फ्लैट में पत्नी और पिता दोनों मौजूद थे।
पुलिस सभी पहलुओं से कर रही जांच
दिल्ली पुलिस फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और पारिवारिक परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले न्यायिक अधिकारी की मानसिक स्थिति कैसी थी और क्या किसी प्रकार का दबाव या विवाद लगातार बना हुआ था।
मानसिक तनाव और पारिवारिक विवाद पर फिर बढ़ी चिंता
इस घटना ने एक बार फिर मानसिक तनाव और पारिवारिक विवादों से जुड़े गंभीर पहलुओं को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार मानसिक दबाव व्यक्ति को गहरे अवसाद की स्थिति में पहुंचा सकता है। ऐसे मामलों में समय रहते संवाद, पारिवारिक सहयोग और मनोवैज्ञानिक सहायता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।