दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या अब केवल हवा और पानी तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीन भी इसके गंभीर प्रभाव की चपेट में आ चुकी है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने यह संकेत दिया है कि कई इलाकों की मिट्टी में सीसे का स्तर बेहद खतरनाक सीमा तक पहुंच गया है, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
टॉक्सिक्स लिंक द्वारा जारी इस अध्ययन में दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों का आकलन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार बैटरी रीसाइक्लिंग इकाइयों के आसपास की मिट्टी में सीसे की मात्रा अत्यधिक पाई गई, जो पर्यावरणीय मानकों से कहीं अधिक है।
मिट्टी के नमूनों में खतरनाक स्तर
अध्ययन के दौरान एकत्र किए गए मिट्टी के 23 नमूनों में 100 ppm से लेकर 43,800 ppm तक सीसे की उपस्थिति दर्ज की गई। इनमें से आधे से अधिक नमूनों में यह स्तर ‘खतरनाक दूषित स्थल’ की श्रेणी से भी ऊपर पाया गया। यह स्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय पर्याप्त नहीं हैं और स्थिति तेजी से बिगड़ रही है।
आवासीय क्षेत्रों और स्कूलों के पास बढ़ा जोखिम
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई नमूने ऐसे स्थानों से लिए गए थे जो आवासीय इलाकों और प्राथमिक विद्यालयों के बेहद करीब हैं। इससे बच्चों और स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य पर विशेष खतरा उत्पन्न हो गया है। सीसा एक अत्यंत विषैला तत्व है, जो शरीर में जाकर तंत्रिका तंत्र, विकास और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
अनियमित रीसाइक्लिंग और नियमों का उल्लंघन
बैटरी रीसाइक्लिंग इकाइयों द्वारा कचरे का उचित निपटान न करना इस समस्या का मुख्य कारण माना जा रहा है। कई स्थानों पर अपशिष्ट खुले में फेंका जा रहा है, जिससे मिट्टी और भूजल दोनों प्रदूषित हो रहे हैं। यह स्थिति देश के बैटरी कचरा प्रबंधन नियम, 2022 और विस्तारित उत्पादक दायित्व ढांचे के उल्लंघन को दर्शाती है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर
सीसे के बढ़ते स्तर का सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से बच्चों में बौद्धिक विकास प्रभावित हो सकता है, जबकि वयस्कों में यह कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता जताई है।
समाधान की दिशा में सख्त कदम जरूरी
इस बढ़ते खतरे को नियंत्रित करने के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियों को सख्त कदम उठाने होंगे। प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर निगरानी बढ़ाने, नियमों का कड़ाई से पालन कराने और जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी और जल की नियमित जांच भी अनिवार्य होनी चाहिए ताकि समय रहते इस खतरे को रोका जा सके।