मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “सियासत का रिजेक्टेड माल” करार दिया।
पीएम मोदी की अपील पर बढ़ा राजनीतिक विवाद
हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा संकट के बीच देशवासियों से पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल, गैस और सोने के इस्तेमाल में संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो का इस्तेमाल बढ़ाने की भी बात कही थी। इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि प्रधानमंत्री जनता से त्याग मांग रहे हैं। उन्होंने लिखा कि “सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो” जैसे सुझाव सरकार की नाकामी के सबूत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 साल की सरकार के बाद अब जनता को यह बताया जा रहा है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और क्या नहीं।
फडणवीस का पलटवार
राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा,“राहुल गांधी भारत की राजनीति के सबसे रिजेक्टेड माल हैं। उन्हें हर राज्य की जनता ने अस्वीकार किया है। लोकतंत्र में वही महत्वपूर्ण होता है जिसे जनता स्वीकार करे।” उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी जैसे नेताओं को वह ज्यादा महत्व नहीं देते क्योंकि देश लगातार प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़ा है।
“देश पीएम मोदी के साथ खड़ा है”
फडणवीस ने कहा कि जनता पिछले 12 वर्षों से लगातार पीएम मोदी को समर्थन और आशीर्वाद दे रही है। उन्होंने दावा किया कि देश प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर भरोसा करता है और विपक्ष सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी कर रहा है।
पीएम मोदी ने क्या अपील की थी?
प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोगों से पेट्रोलियम उत्पादों और आयातित वस्तुओं का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वैश्विक संकट का असर कम किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती, सीएनजी, इथेनॉल और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की भी बात कही थी।
सियासी बयानबाजी तेज
राहुल गांधी और देवेंद्र फडणवीस के बयानों के बाद यह मुद्दा अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। सत्ता पक्ष जहां प्रधानमंत्री की अपील को जिम्मेदार नागरिकता बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता करार दे रहा है।