भोपाल |मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। जीतू पटवारी के एक बयान ने न केवल अटकलों को हवा दी है, बल्कि दिग्विजय सिंह का नाम एक बार फिर रेस में ला खड़ा किया है।
पटवारी ने खुद को किया बाहर, दिग्विजय पर इशारा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने साफ कहा कि वे राज्यसभा की दौड़ में नहीं हैं। उन्होंने कहा,“मैं तो राज्यसभा नहीं जाऊंगा, लेकिन दिग्विजय सिंह हो सकते हैं उम्मीदवार। अंतिम फैसला पार्टी ही करेगी।” पटवारी के इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस एक बार फिर अनुभवी नेता दिग्विजय सिंह पर दांव लगा सकती है।
पहले इनकार, अब फिर चर्चा में दिग्विजय
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे राज्यसभा नहीं जाएंगे। उनका कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है। हालांकि, उनके इस बयान के बावजूद पार्टी के भीतर उनका नाम फिर से उभरना कई सवाल खड़े कर रहा है।
दिल्ली मीटिंग के बाद बढ़ी सियासी सरगर्मी
हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक की एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें हरीश चौधरी, उमंग सिंघार, जीतू पटवारी और अन्य नेता मौजूद थे। बताया जा रहा है कि इस बैठक में राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर मंथन हुआ था।
“अध्यक्ष पद की गरिमा…” कहकर पीछे हटे पटवारी
पटवारी ने अपनी दावेदारी हटाने के पीछे संगठनात्मक जिम्मेदारी को कारण बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष का पद महत्वपूर्ण है और वे उसी पर फोकस करना चाहते हैं।
हार्स ट्रेडिंग पर कांग्रेस का हमला
जीतू पटवारी ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “मध्य प्रदेश में हार्स ट्रेडिंग नहीं होगी। भाजपा लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और चुनावी संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस 50% राज्यसभा सीटें जीत सकती है।
बीजेपी का पलटवार,“कांग्रेस में लीडरशिप नहीं”
वहीं भाजपा की ओर से प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा “कांग्रेस में कोई सिस्टम नहीं बचा है। यहां नेता खुद तय कर रहे हैं कि उन्हें जाना है या नहीं। यह नेतृत्व की कमजोरी को दिखाता है।”
क्या फिर बदलेंगे समीकरण?
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। एक ओर वरिष्ठता और अनुभव का सवाल है, तो दूसरी ओर नए नेतृत्व को मौका देने की बहस भी जारी है। अब सबकी नजर कांग्रेस हाईकमान के फैसले पर टिकी है,क्या पार्टी फिर से दिग्विजय सिंह पर भरोसा जताएगी या कोई नया चेहरा सामने आएगा?
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