प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला चैत्र नवरात्र के पहले दिन गुरुवार से प्रारंभ हो गया। सरकार ने राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को बनाया है। अपर मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए आईएएस अधिकारी केके सिंह सदस्य होंगे।
मध्यप्रदेश में निगम, मंडल और आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया अब रफ्तार पकड़ने वाली है। छठवें राज्य वित्त आयोग में वरिष्ठ भाजपा नेता की नियुक्ति के बाद सरकार जल्द ही अन्य आयोगों और निगमों में भी चेयरमैन और सदस्यों की घोषणा कर सकती है। इसे संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
संगठन में सक्रिय रहे नेताओं को मिल सकता है मौका
सूत्रों के मुताबिक, आगामी सूची में उन नेताओं को प्राथमिकता दी जा सकती है जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं, लेकिन हाल के चुनावों या मंत्रिमंडल में स्थान नहीं पा सके। पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद, संगठन पदाधिकारी और चुनाव प्रबंधन में अहम भूमिका निभाने वाले नेताओं के नामों पर मंथन चल रहा है।
ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड पर विशेष फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड अंचल पर सरकार का विशेष फोकस रहेगा। इन क्षेत्रों में भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं को दायित्व देकर क्षेत्रीय संतुलन साधने की तैयारी है। इससे आगामी चुनावी रणनीति को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री और संगठन के बीच समन्वय
मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन के शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार समन्वय बना हुआ है। नियुक्तियों की सूची पर अंतिम निर्णय से पहले संगठन से फीडबैक लिया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की असंतोष की स्थिति न बने।
एक-दो सप्ताह में हो सकती है अगली घोषणा
सूत्रों का दावा है कि एक से दो सप्ताह के भीतर दूसरी सूची जारी हो सकती है। इसमें राज्य के प्रमुख निगमों, विकास प्राधिकरणों और सलाहकार आयोगों में नियुक्तियां संभव हैं। राजनीतिक नियुक्तियों की इस श्रृंखला से भाजपा के भीतर सक्रियता और संतुलन दोनों साधने की कोशिश की जा रही है।
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