नई दिल्ली. देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच आयोग ने एक बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल ड्राइव चलाने का निर्देश दिया है जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ऐसे योग्य मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ना है जो एसआईआर के दौरान किसी वजह से छूट गए हैं या बाद में वोट देने के योग्य हुए हैं। चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर यह निर्देश दिया था। इसके बाद गुरुवार को राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी आयोग ने इस निर्देश को दोहराया। यह कदम मतदाता सूची की निरंतर अपडेट प्रक्रिया के तहत उठाया गया है।
योग्य और युवा मतदाताओं को शामिल करने का लक्ष्य
आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों से कहा है कि वे वोटर लिस्ट को लगातार अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत ऐसे योग्य लोगों के नाम जोड़ने में मदद करें जो अब तक वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए हैं। इसके अलावा युवा और पहली बार मतदान करने वाले योग्य लोगों को भी वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा। यह अभियान उन सभी योग्य नागरिकों के लिए अवसर प्रदान करेगा जिनका नाम किसी कारणवश छूट गया था। आयोग का स्पष्ट मकसद है कि कोई भी पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। इस विशेष अभियान के जरिए वोटर लिस्ट को और अधिक समावेशी तथा सटीक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारी घर-घर जाकर भी योग्य लोगों की पहचान कर सकते हैं।
फॉर्म 6 से नाम जोड़ने की सुविधा
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पूरा हो चुका है वहां मतदाता सूची में दोबारा नाम जुड़वाने के लिए लोग सामान्य फॉर्म 6 का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए एसआईआर के दौरान लगाए गए अतिरिक्त घोषणा पत्र की जरूरत नहीं होगी। निर्वाचन आयोग ने 29 सितंबर के अपने निर्देश में साफ किया है कि एसआईआर से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा पत्र केवल एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान ही लागू था। एसआईआर की अवधि खत्म होने के बाद वोटर रजिस्ट्रेशन नियम 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। यह प्रावधान उन लोगों के लिए राहत भरा है जो अतिरिक्त दस्तावेजों की जटिलताओं के कारण नाम नहीं जुड़वा पाए थे। अब प्रक्रिया सरल और सुगम हो गई है।
निरंतर अपडेट की प्रक्रिया पर जोर
आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे निरंतर अपडेट की प्रक्रिया के तहत छूटे हुए और नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाएं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी जिला स्तर के अधिकारियों के साथ मिलकर इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करेंगे। पूर्व और पश्चात की सूचियों की तुलना कर छूटे नामों की पहचान की जाएगी। जिन लोगों के नाम डुप्लिकेट या मृतक नहीं हैं तथा अन्य जगह मैप नहीं हुए हैं उनके घर जाकर फॉर्म भरवाए जा सकते हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि योग्य नागरिक आसानी से अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज करा सकें। आयोग का यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
एसआईआर विवाद और आयोग का जवाब
एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर उठे सवालों के बीच यह फैसला आया है। ज्ञानेश कुमार के विरोध के बीच भी आयोग ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए योग्य मतदाताओं को फिर से मौका देने का निर्णय लिया। आयोग का मानना है कि मतदाता सूची को साफ-सुथरा रखने के साथ-साथ किसी भी पात्र व्यक्ति को अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इस स्पेशल ड्राइव के जरिए उन चिंताओं का समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है जो नाम हटने को लेकर सामने आई थीं। युवा मतदाताओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने से लोकतंत्र में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ेगी। आयोग के इस कदम से वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता और व्यापकता दोनों में सुधार की उम्मीद है।