भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई ने नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ सख्त एक्शन लिया है। मामला शिशुओं के न्यूट्रिशन फूड प्रोडक्ट्स के गलत विज्ञापन से जुड़ा है। नेस्ले इंडिया लिमिटेड की यूनिट वन और यूनिट टू के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। कंपनी पर आरोप है कि उसने बेबी न्यूट्रिशन फूड का ऐसा विज्ञापन किया जिसमें जिस पोषण तत्व का दावा किया गया वह प्रोडक्ट में मौजूद ही नहीं था। एफएसएसएआई ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों में गलत दावे को गंभीरता से लिया गया है।
किन प्रोडक्ट्स में किए गए गलत दावे
नेस्ले इंडिया शिशुओं के लिए एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज 1 और लैक्टोजेन प्रो 1 फॉर्मूला मिल्क पाउडर बेचती है। एफएसएसएआई ने इन न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उनके विज्ञापनों की जांच की। जांच में पता चला कि नेस्ले एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज 1 में 5 एचएमओ और व्हे प्रोटीन से जुड़े दावे कर रही थी। लैक्टोजेन प्रो 1 के विज्ञापन में व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने का दावा किया जा रहा था। ये दावे प्रोडक्ट की असल संरचना से मेल नहीं खाते पाए गए। विज्ञापनों के जरिए बिक्री बढ़ाने के इरादे से गलत जानकारी दी जा रही थी।
मानकों का उल्लंघन और स्पष्टीकरण की मांग
एफएसएसएआई की जांच में नेस्ले इंडिया के इन दावों को गलत पाया गया। प्राधिकरण ने कंपनी से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। नेस्ले को दोनों उत्पादों में एफएसएस शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ विनियम 2020 के विनियम 4(2) का उल्लंघन करते पाया गया। जांच में साफ हुआ कि कंपनी इन प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने के लिए विज्ञापन में गलत दावे कर रही थी। साथ ही विज्ञापन और प्रचार पर रोक लगाने वाली धारा का भी उल्लंघन किया गया। बच्चों के पोषण से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
लैब जांच में फेल हुए सैंपल
नेस्ले इंडिया के बनाए गए फॉलो-अप फॉर्मूला का एक नया सैंपल लैब जांच में बायोटिन की मात्रा के मामले में मानक पर खरा नहीं उतर सका। सैंपल को दोबारा जांच के लिए भेजा गया। रेफरल लैब में भी यही नतीजा निकला कि यह सैंपल खाद्य सुरक्षा और मानक शिशु पोषण विनियम 2020 के तहत निर्धारित बायोटिन की जरूरतों के मुताबिक नहीं है। लैब रिपोर्ट ने कंपनी के दावों की पोल खोल दी। तीन उत्पादों के मामले में अलग-अलग कार्रवाई शुरू की गई है। लैब जांच के नतीजे कंपनी के लिए मुश्किल खड़ी करने वाले साबित हुए हैं।
उपभोक्ताओं और बच्चों के हित में सख्ती
एफएसएसएआई का यह एक्शन शिशु आहार उत्पादों में पारदर्शिता और सही जानकारी सुनिश्चित करने की दिशा में है। गलत पोषण दावों से अभिभावक भ्रमित हो सकते हैं और बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। प्राधिकरण ने साफ संदेश दिया है कि खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नेस्ले इंडिया को अब कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा। इस मामले में आगे की कार्रवाई कंपनी के जवाब और जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक मानकों वाले उत्पादों पर ही भरोसा करें।