वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता के बीच सोने की कीमतों में आई हालिया गिरावट ने निवेशकों को हैरान कर दिया है। मार्च 2026 के मात्र पच्चीस दिनों के भीतर कीमतों में लगभग बीस प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो पिछले पचास वर्षों में किसी भी महीने की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। लंबे समय से सुरक्षित निवेश के रूप में देखे जाने वाले सोने के प्रति निवेशकों का भरोसा इस गिरावट के बाद कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
इतिहास की याद दिलाता पुराना संकट
विशेषज्ञ इस गिरावट की तुलना वर्ष 1975 में आए बड़े बाजार संकट से कर रहे हैं। उस समय भी परिस्थितियां कुछ इसी प्रकार बनी थीं, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अचानक कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली थी। वर्तमान स्थिति ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सोना भी बाजार की अनिश्चितताओं से पूरी तरह अछूता नहीं है।
नीतिगत बदलाव से पहले भी मचा था असर
सत्तर के दशक के मध्य में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के बाद बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। निजी तौर पर सोना रखने की अनुमति मिलने के बाद कीमतों में तेजी की उम्मीद थी, लेकिन इसके विपरीत कीमतें तेजी से नीचे आ गईं। उस समय यह गिरावट निवेशकों के लिए बड़ा झटका साबित हुई थी, क्योंकि आमदनी के मुकाबले सोने की कीमतों में यह परिवर्तन काफी बड़ा माना जाता था।
लगातार बिकवाली ने बढ़ाया दबाव
वर्तमान परिदृश्य में भी कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण लगातार हो रही बिकवाली को माना जा रहा है। फरवरी के अंत से शुरू हुई यह गिरावट मार्च में और तेज हो गई, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी। निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोना बेचने से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर असर पड़ा और कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा।
निवेशकों के लिए बढ़ी चुनौती
इस गिरावट ने उन निवेशकों को सबसे अधिक प्रभावित किया है जिन्होंने ऊंचे स्तर पर सोना खरीदा था। अब उनके सामने नुकसान की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
बाजार में अनिश्चितता के बीच सतर्कता जरूरी
वर्तमान परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक कारकों का सीधा प्रभाव सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। बाजार की बदलती स्थिति के बीच संतुलित और सोच-समझकर किया गया निवेश ही जोखिम को कम कर सकता है।