गुलमर्ग की बर्फ से ढकी ऊंची पहाड़ियों पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक निजी हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। हेलीकॉप्टर में सवार 24 पर्यटक 14 हजार फीट की ऊंचाई पर फंस गए, जहां लगातार बिगड़ता मौसम और घना कोहरा स्थिति को बेहद खतरनाक बना रहा था। चारों तरफ बर्फीली चोटियां और वीरान वादियां थीं, जबकि मदद पहुंचाना आसान नहीं था।
घने कोहरे ने बढ़ाई बचाव अभियान की मुश्किल
घटना के समय इलाके में विजिबिलिटी बेहद कम थी और मौसम तेजी से खराब हो रहा था। बर्फबारी और ठंडी हवाओं के कारण बचाव अभियान चलाना बड़ी चुनौती बन गया। ऊंचाई वाले क्षेत्र में ऑक्सीजन का स्तर कम होने और हेलीकॉप्टर की सुरक्षित लैंडिंग के लिए सीमित जगह ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया था।
सेना ने संभाली मोर्चे की कमान
हालात गंभीर होते देख भारतीय सेना के चिनार वॉरियर्स ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इस अभियान में जम्मू-कश्मीर पुलिस, बारामूला जिला प्रशासन और गुलमर्ग डेवलपमेंट अथॉरिटी ने भी सेना के साथ मिलकर काम किया। सेना के एविएशन पायलट्स और एयरक्रू ने बेहद खराब मौसम के बावजूद कई बार उड़ान भरकर पर्यटकों तक पहुंचने की कोशिश की।
जान जोखिम में डालकर पहुंची राहत टीम
कम विजिबिलिटी और तेज हवाओं के बीच हेलीकॉप्टर उड़ाना अत्यंत जोखिम भरा माना जा रहा था। इसके बावजूद सेना के पायलट्स ने अद्भुत साहस और सटीक रणनीति का परिचय दिया। बचाव दल ने बर्फीले इलाके में बेहद सावधानी से हेलीकॉप्टर उतारा और सभी पर्यटकों तक सुरक्षित पहुंच बनाई। सेना के इस अभियान को स्थानीय लोग और पर्यटक किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।
सभी पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया
कई घंटों तक चले चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद सभी 24 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। बचाए गए पर्यटकों ने सेना और बचाव दल के प्रति गहरा आभार जताया और कहा कि मुश्किल हालात में सेना उनके लिए देवदूत बनकर सामने आई।
साहस और समन्वय की मिसाल बना अभियान
विशेषज्ञों के अनुसार ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों में इस तरह का रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद कठिन माना जाता है। खराब मौसम, कम ऑक्सीजन और सीमित लैंडिंग स्पेस के बीच सफलतापूर्वक मिशन पूरा करना सेना की दक्षता और प्रशिक्षण को दर्शाता है। इस अभियान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में भारतीय सेना हर चुनौती से मुकाबला करने के लिए तैयार रहती है।
पर्यटन सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल
घटना के बाद पहाड़ी पर्यटन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्थाओं और मौसम संबंधी सतर्कता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले इलाकों में उड़ान संचालन और पर्यटन गतिविधियों के दौरान मौसम की सटीक निगरानी तथा आपातकालीन तैयारी बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।