पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है। Hormuz Strait में भारत से जुड़े कुल 28 जहाज फंसे हुए हैं, जिससे ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
28 जहाज फंसे, कई में ईंधन लदा
केंद्र सरकार के मुताबिक, फंसे जहाजों में 18 भारतीय ध्वज वाले और 10 विदेशी जहाज शामिल हैं। इनमें बड़ी मात्रा में एलपीजी, एलएनजी और कच्चा तेल लदा हुआ है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों से सीधे जुड़ा है।
विदेशी जहाज: 3 एलपीजी, 4 क्रूड ऑयल, 3 एलएनजी
भारतीय जहाज: 3 एलपीजी, 1 एलएनजी, 4 क्रूड ऑयल
एक खाली जहाज भी एलपीजी लेने के लिए जा रहा था, जो रास्ते में ही फंस गया
485 भारतीय नाविक समुद्र में फंसे
इन 18 भारतीय जहाजों पर कुल 485 नाविक सवार हैं, जो फिलहाल समुद्र में ही रुके हुए हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार निगरानी कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बनने के समय ये सभी जहाज हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में मौजूद थे। इनमें से 24 जहाज पश्चिमी हिस्से में और 4 पूर्वी हिस्से में फंसे हुए थे। हाल ही में ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के बाद 8 जहाजों को निकलने की अनुमति मिली है, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
सरकार की कूटनीतिक कोशिशें जारी
जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव Rajesh Sinha ने बताया कि बाकी जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार बातचीत जारी है। सरकार का कहना है कि ईरान के साथ हर स्तर पर संवाद हो रहा है, ताकि जल्द से जल्द सभी जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सके।
ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां रुकावट आने से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर सीधा असर पड़ता है। इतनी बड़ी संख्या में जहाजों के फंसे रहने से ईंधन आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर समाधान निकालने की कोशिश जारी है। आने वाले दिनों में बातचीत के नतीजे ही तय करेंगे कि यह संकट कितना लंबा खिंचता है।