कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण (23-29 अप्रैल) से ठीक पहले राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस ने 16 अप्रैल को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कर Humayun Kabir पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि कबीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान Abhishek Banerjee और अन्य नेताओं के खिलाफ अपमानजनक और धमकी भरे बयान दिए।
क्या है पूरा मामला
TMC के अनुसार, कबीर ने अपने संबोधन में कई नेताओं पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कथित तौर पर “हत्या करके दफना देंगे” जैसी धमकी दी। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। पार्टी का आरोप है कि यह बयान चुनावी माहौल को प्रभावित करने और मतदाताओं को डराने के इरादे से दिया गया।
कौन हैं हुमायूं कबीर
हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद जिले की भरतपुर सीट से पूर्व तृणमूल कांग्रे विधायक रह चुके हैं। दिसंबर 2025 में पार्टी से अलग होने के बाद उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) का गठन किया और अब इसके प्रमुख हैं। 2026 चुनाव में उनकी पार्टी ने बड़ी संख्या में उम्मीदवार उतारे हैं और कबीर खुद भी दो सीटों से मैदान में हैं।
AIMIM से टूटा गठबंधन
हाल ही में अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने AJUP के साथ अपना गठबंधन समाप्त कर दिया। इसके पीछे एक कथित स्टिंग वीडियो को वजह बताया गया, जिसमें कबीर पर भाजपा के साथ सौदेबाजी के आरोप लगाए गए। कबीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे साजिश बताया है।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं कबीर
हुमायूं कबीर का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। धार्मिक मुद्दों पर बयानबाजी और कथित धमकी भरे भाषणों को लेकर वे सुर्खियों में रहे हैं। सुरक्षा कारणों से उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा भी दी जा चुकी है।
कानूनी उल्लंघन के आरोप
तृणमूल कांग्रेस ने अपनी शिकायत में कहा है कि कबीर के बयान आचार संहिता का उल्लंघन हैं। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मामला बनता है, जिनमें मानहानि, आपराधिक धमकी और चुनाव के दौरान अनुचित प्रभाव डालने जैसे आरोप शामिल हैं।
चुनाव आयोग से क्या मांग
TMC ने चुनाव आयोग से मांग की है कि कबीर को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए, उनके खिलाफ FIR दर्ज हो और सख्त कार्रवाई की जाए ताकि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।
AJUP की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले पर अब तक कबीर या उनकी पार्टी AJUP की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि इससे पहले वे इस तरह के आरोपों को राजनीतिक साजिश बता चुके हैं।
चुनावी माहौल पर असर
बंगाल का यह चुनाव पहले से ही बेहद अहम माना जा रहा है, जहां सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस, विपक्षी दलों और नए राजनीतिक समीकरणों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में बागी नेताओं की एंट्री से वोटों के बंटवारे की संभावना और बढ़ गई है।
फिलहाल क्या स्थिति है
17 अप्रैल तक चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। जांच आगे बढ़ने पर वीडियो की फॉरेंसिक जांच भी हो सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले पर आयोग का रुख चुनावी दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।