पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए भारत सरकार ने नई एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास तेहरान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सभी भारतीय नागरिक जितनी जल्दी संभव हो, सुरक्षित तरीके से देश छोड़ दें। यह कदम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उठाया गया है।
सुरक्षित मार्ग अपनाने पर जोर
दूतावास ने अपनी एडवाइजरी में विशेष रूप से यह निर्देश दिया है कि नागरिक केवल निर्धारित और सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग करें। बिना अनुमति और समन्वय के किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर बढ़ने से सख्त मना किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार हर नागरिक की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए नियंत्रित और व्यवस्थित प्रक्रिया अपना रही है।
पहले दी गई थी रुकने की सलाह
इससे पहले हालात की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नागरिकों को अस्थायी रूप से वहीं सुरक्षित रहने की सलाह दी गई थी। उस समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के तेज होने की आशंका जताई जा रही थी, जिसके चलते तत्काल यात्रा को जोखिम भरा माना गया था। हालांकि अब परिस्थितियों के मूल्यांकन के बाद सरकार ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।
वैश्विक तनाव का बढ़ता प्रभाव
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव मुख्य कारण है। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दी गई चेतावनियों और क्षेत्रीय घटनाओं ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हालांकि हाल ही में सीमित अवधि के संघर्ष विराम की घोषणा की गई है, फिर भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं माने जा रहे हैं।
ईरान में भारतीयों की स्थिति
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार संघर्ष की शुरुआत के समय ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक मौजूद थे। इनमें छात्र, कामगार और विभिन्न पेशों से जुड़े लोग शामिल थे। अब तक करीब 1,800 नागरिक सुरक्षित भारत लौट चुके हैं, जबकि बाकी लोगों को भी चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया जारी है।
सतर्कता और समन्वय की जरूरत
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे हर स्थिति में दूतावास के संपर्क में रहें और किसी भी आपात स्थिति में जारी हेल्पलाइन का उपयोग करें। यह एडवाइजरी इस बात का संकेत है कि वर्तमान हालात में सतर्कता और समन्वय ही सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है। आने वाले दिनों में सरकार की प्राथमिकता सभी नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना रहेगी।