कानपुर । कलेक्ट्रेट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां तीन जूनियर क्लर्कों को टाइपिंग टेस्ट में लगातार फेल होने पर उनके पद से हटा कर चपरासी बना दिया गया। सरकारी नियम के मुताबिक, जूनियर क्लर्क को एक मिनट में कम से कम 25 शब्द टाइप करना अनिवार्य है, लेकिन इन कर्मचारियों ने दो बार मौका मिलने के बावजूद यह मानक पूरा नहीं किया।
दूसरी बार भी परिणाम वही रहा
पहली बार असफल होने पर प्रशासन ने उनकी सैलरी इंक्रीमेंट रोक दी थी और सुधार का अवसर दिया, लेकिन दूसरी बार भी परिणाम वही रहा। इसके बाद जिलाधिकारी ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें डिमोशन कर दिया।
सरकारी दफ्तरों में काम की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी
प्रशासन ने कहा कि सरकारी दफ्तरों में काम की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि टाइपिंग जैसे बुनियादी कौशल की कमी से दस्तावेज तैयार करने और फाइलों के काम में बाधा आती है। हालांकि, यह मामला बहस का विषय बन गया है—कुछ लोग इसे अनुशासन बनाए रखने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि कर्मचारियों को अधिक प्रशिक्षण या समय दिया जाना चाहिए था।