पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री मार्गों में संभावित बाधा ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी की बड़ी मात्रा भारत तक पहुंचती है। इसी कारण संभावित संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने समय रहते कई वैकल्पिक और अस्थायी उपाय लागू किए हैं ताकि देश में ईंधन आपूर्ति की निरंतरता बनी रहे।
घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन की अस्थायी वापसी
ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित दबाव को देखते हुए सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन के सीमित और अस्थायी उपयोग को पुनः अनुमति देने का निर्णय लिया है। राज्यों को उनके नियमित मासिक आवंटन के अतिरिक्त लगभग अड़तालीस हजार किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन उपलब्ध कराया गया है। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी क्षेत्र में एलपीजी की आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित होती है तो घरेलू खाना पकाने की व्यवस्था बाधित न हो। यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी बताई जा रही है और इसे केवल आपातकालीन विकल्प के रूप में लागू किया गया है।
होटल और रेस्तरां के लिए वैकल्पिक ईंधन
सरकार ने वाणिज्यिक क्षेत्रों में एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पर्यावरण नियामक संस्थाओं से अनुरोध किया गया है कि वे सीमित अवधि के लिए होटल और रेस्तरां को बायोमास तथा कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की अनुमति दें। इस व्यवस्था से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति को भी नियंत्रित किया गया है ताकि अनावश्यक खपत को रोका जा सके।
घबराहट में बढ़ी एलपीजी बुकिंग
अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में एलपीजी बुकिंग में अचानक वृद्धि वास्तविक कमी के कारण नहीं बल्कि लोगों द्वारा घबराहट में की गई अतिरिक्त बुकिंग के कारण हुई है। इसी कारण शहरी क्षेत्रों में एलपीजी सिलिंडर की नई बुकिंग अब पच्चीस दिनों के अंतराल के बाद और ग्रामीण क्षेत्रों में पैंतालीस दिनों के अंतराल के बाद ही स्वीकार की जाएगी। साथ ही जमाखोरी और अवैध बिक्री को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था भी सख्त की गई है।
पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक व्यवधान के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। देश की रिफाइनरियां उच्च क्षमता से कार्य कर रही हैं और कई मामलों में उत्पादन क्षमता सौ प्रतिशत से भी अधिक स्तर तक पहुंच गई है। इसके अतिरिक्त कच्चे तेल की आपूर्ति को विविध स्रोतों से सुनिश्चित किया गया है। जहां पहले भारत लगभग सत्ताईस देशों से कच्चा तेल खरीदता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग चालीस देशों तक पहुंच गई है।
एलपीजी आयात में आई चुनौतिया
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार संकट से पहले भारत के एलपीजी आयात का लगभग साठ प्रतिशत हिस्सा खाड़ी क्षेत्र के देशों से आता था। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण इन आपूर्तियों पर दबाव बढ़ा है। इसी कारण सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों से गैस आयात की व्यवस्था को भी मजबूत किया है ताकि आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित न हो।
नए स्रोतों से गैस आपूर्ति की व्यवस्था
सरकार ने बताया है कि खाड़ी क्षेत्र के पारंपरिक स्रोतों के अलावा अब अन्य देशों से भी एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। अमेरिका, नार्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी गैस आयात बढ़ाया गया है। इसके साथ ही घरेलू उत्पादन में भी लगभग अट्ठाईस प्रतिशत की वृद्धि की गई है ताकि आयात पर निर्भरता को कुछ हद तक कम किया जा सके। इन उपायों के माध्यम से सरकार देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने का प्रयास कर रही है।
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