नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हालात गंभीर हो गए हैं। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने फंसे भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए स्पेशल ऑपरेशन लॉन्च किया है।
20 हजार भारतीय नाविक फंसे
ताजा जानकारी के मुताबिक, करीब 20,000 भारतीय नाविक इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में फंसे हुए हैं। ये नाविक अलग-अलग जहाजों पर तैनात हैं और मौजूदा हालात के कारण उनकी आवाजाही और सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है।
18 जहाजों पर असर
इस संकट का असर सिर्फ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत से जुड़े करीब 18 जहाज भी प्रभावित हुए हैं। इन जहाजों में कच्चा तेल और गैस लदी हुई है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम है। इन जहाजों में 4 LPG गैस, 3 LNG (लिक्विड नेचुरल गैस) के और 11 कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। इनमें से 5 जहाज भारतीय झंडे वाले हैं, जबकि 13 जहाज लीज पर लिए गए हैं। लोकेशन के हिसाब से 15 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में, 3 ओमान की खाड़ी में, 3 अदन की खाड़ी में और 2 लाल सागर क्षेत्र में मौजूद हैं, जिससे पूरे इलाके में सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
बातचीत बेनतीजा रही
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। बातचीत के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल वापस लौट गए, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
भारत की बढ़ी चिंता
भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि देश का बड़ा तेल आयात इसी रास्ते से होता है। इसके अलावा हजारों भारतीय नागरिक इस क्षेत्र में काम करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और ऊर्जा सप्लाई दोनों को लेकर सरकार अलर्ट मोड में है। भारत सरकार का यह स्पेशल ऑपरेशन तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्राथमिकता फंसे हुए भारतीयों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सप्लाई को प्रभावित होने से बचाने की है। आने वाले दिनों में इस मिशन को और तेज किया जा सकता है।