भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए घरेलू एलपीजी उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश की घरेलू एलपीजी उत्पादन क्षमता अब कुल जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो कुछ ही समय पहले करीब 40 प्रतिशत थी। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो रही है, जिससे यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पश्चिम एशिया संकट का सीधा असर
पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात और समुद्री मार्गों में व्यवधान ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे आयात में अचानक गिरावट आई। इससे पहले भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरत आयात के माध्यम से पूरा करता था, जिसमें प्रमुख हिस्सेदारी पश्चिम एशियाई देशों की थी।
उपभोग में गिरावट और आपूर्ति प्रबंधन
आपूर्ति में आई बाधाओं के चलते एलपीजी खपत में भी गिरावट दर्ज की गई। जनवरी और फरवरी की तुलना में मार्च में खपत में उल्लेखनीय कमी आई, जो लगभग 26 प्रतिशत तक रही। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने रणनीतिक कदम उठाते हुए घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता दी और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति में अस्थायी कटौती की।
रिफाइनरियों की भूमिका और उत्पादन में तेजी
घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए देश की रिफाइनरियों को निर्देशित किया गया कि वे एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता दें। इसके लिए पेट्रोकेमिकल उत्पादन में आंशिक कमी कर एलपीजी उत्पादन को बढ़ाया गया। इस रणनीति के चलते कम समय में उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सकी और देश की ऊर्जा जरूरतों को संतुलित किया जा सका।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि देश के करोड़ों घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी की आपूर्ति में किसी प्रकार की कमी न हो। लगभग 33 करोड़ से अधिक परिवारों को निर्बाध गैस आपूर्ति दी गई, जिससे आम जनजीवन पर संकट का प्रभाव न्यूनतम रहा। यह कदम सरकार की सामाजिक प्रतिबद्धता और जनहित की प्राथमिकता को दर्शाता है।
आयात के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश
हालांकि पश्चिम एशिया से आपूर्ति प्रभावित हुई, फिर भी भारत ने अन्य देशों से आयात के विकल्पों को सक्रिय रखा। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों से एलपीजी आयात जारी रहा, जिससे आपूर्ति संतुलन बनाए रखने में मदद मिली। यह रणनीति भारत की ऊर्जा नीति की लचीलापन और दूरदर्शिता को भी दर्शाती है।
आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत संकेत
एलपीजी उत्पादन में यह तेजी भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत संकेत देती है। यह न केवल आयात पर निर्भरता को कम करेगी, बल्कि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश को अधिक सक्षम बनाएगी। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।