नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक चार सितंबर को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में चौवालीस दशमलव नौ अरब डॉलर की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि इस श्रृंखला का अब तक का सबसे बड़ा साप्ताहिक उछाल है जिसने कुल भंडार को साढ़े सात सौ पचासी दशमलव सात अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। इस तेज बढ़त के कारण भारत दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में चौथे स्थान पर आ गया है तथा उसने कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछाल देश की आर्थिक स्थिरता और विदेशी निवेशकों के बढ़ते विश्वास का स्पष्ट संकेत है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को यह आंकड़ा और अधिक रेखांकित करता है।
पिछले दो दशकों में पांच गुना से अधिक वृद्धि
वर्ष दो हजार पांच में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग एक सौ इकतालीस दशमलव दो अरब डॉलर था। तब से लेकर अब तक यह भंडार पांच गुना से अधिक बढ़ चुका है। इस लंबी अवधि में देश ने दो हजार आठ के वैश्विक वित्तीय संकट, कोविड महामारी तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की कई उथल-पुथल जैसी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया। इन सभी कठिन दौरों में भी विदेशी मुद्रा भंडार में निरंतर वृद्धि बनी रही जो नीतिगत स्थिरता और मजबूत आर्थिक प्रबंधन का प्रमाण है। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो दशकों में भंडार में हुई यह बढ़ोतरी भारत को वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अधिक सुरक्षित स्थिति प्रदान करती है। यह उपलब्धि देश की दीर्घकालिक आर्थिक नीति की सफलता को भी दर्शाती है।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में हुई प्रमुख बढ़ोतरी
इस सप्ताह की तेज वृद्धि का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में हुआ उल्लेखनीय इजाफा है। आरबीआई के अनुसार विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में सैंतालीस दशमलव पांच अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई जो कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा है। हालांकि इसी अवधि में स्वर्ण भंडार में लगभग दो दशमलव छह अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई जिसने समग्र वृद्धि के प्रभाव को थोड़ा कम किया। इसके बावजूद शुद्ध रूप से भंडार में भारी उछाल देखने को मिला। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में हुई यह तेजी मुख्य रूप से डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति तथा विदेशी निवेश प्रवाह से जुड़ी हुई मानी जा रही है। यह घटक देश की बाहरी वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वर्ण भंडार और अन्य घटकों की वर्तमान स्थिति
चार सितंबर तक की स्थिति के अनुसार विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां छह सौ अड़तालीस दशमलव दो अरब डॉलर पर पहुंच गईं। स्वर्ण भंडार का मूल्य एक सौ तेरह दशमलव आठ अरब डॉलर आंका गया जबकि विशेष आहरण अधिकार यानी एसडीआर अठारह दशमलव आठ अरब डॉलर के स्तर पर रहे। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की रिजर्व स्थिति चार दशमलव नौ अरब डॉलर आंकी गई। इन सभी घटकों को मिलाकर कुल भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। स्वर्ण भंडार में हुई मामूली गिरावट के बावजूद अन्य प्रमुख घटकों में हुई मजबूती ने समग्र स्थिति को सकारात्मक बनाए रखा। यह विविधता भरे भंडार संरचना देश को विभिन्न वैश्विक जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाती है।
वैश्विक तुलना और आर्थिक मजबूती का स्पष्ट संकेत
इस रिकॉर्ड स्तर के साथ भारत ने पाकिस्तान और रूस सहित कई देशों को विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में पीछे छोड़ दिया है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो मार्च दो हजार पच्चीस में दर्ज पिछले बड़े उछाल की तुलना में हालिया बढ़त लगभग दोगुनी है। यह उपलब्धि भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव और बाहरी क्षेत्र की स्थिरता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े भंडार से देश को आयात कवरेज तथा विदेशी भुगतान संबंधी किसी भी संभावित दबाव से निपटने में आसानी होगी। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बीच भारत का यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सकारात्मक संदेश देने वाला है तथा आगामी वर्षों में आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगा।