न्यू यॉर्क/नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भारत ने पाकिस्तान पर तीखा और करारा हमला बोला है। नई दिल्ली ने इस्लामाबाद को अभूतपूर्व और कड़े शब्दों में आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस देश का अपना इतिहास 'नरसंहार के खून से कलंकित' रहा है, उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी (Harish Parvathaneni) ने वर्ष 1971 के 'ऑपरेशन सर्चलाइट' का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि जिनके अपने देश के इतिहास पर नरसंहार के दाग हैं, उनका भारत के आंतरिक मामलों पर बोलना बेहद हास्यास्पद है। भारतीय प्रतिनिधि ने न केवल 1971 के नरसंहार, बल्कि हाल ही में अफगानिस्तान में हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों का मुद्दा उठाकर इस्लामाबाद के पाखंड को दुनिया के सामने उजागर कर दिया।
नागरिक सुरक्षा की बहस में कूदा पाकिस्तान, भारत का तगड़ा पलटवार
दुनिया भर में जारी सशस्त्र संघर्षों के बीच सुरक्षा परिषद में 'आम नागरिकों की सुरक्षा' को लेकर एक वार्षिक बहस चल रही थी। इसी दौरान पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उछाल दिया। इस पर भारत की ओर से बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया आई। भारत ने आतंकवाद को शह देने की पाकिस्तान की पुरानी आदत का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। भारतीय प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने कहा, "पाकिस्तान लंबे समय से अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए सीमाओं के भीतर और बाहर हिंसा का रास्ता अपनाता रहा है। पाकिस्तान का न केवल अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ, बल्कि अपने ही नागरिकों के खिलाफ भी बर्बर व्यवहार का एक लंबा इतिहास रहा है।"
अफगानिस्तान के अस्पताल पर हमले का किया जिक्र
भारत ने इस साल मार्च महीने में अफगानिस्तान में हुए भयानक पाकिस्तानी हवाई हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया। भारत के अनुसार, रमजान के पवित्र महीने के दौरान पाकिस्तान ने काबुल में 'ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल' को निशाना बनाकर हवाई हमला किया था। इस हमले में बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए थे। UNAMA के आंकड़ों से घेरा: भारतीय प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन (UNAMA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उस हमले में कम से कम 269 लोग मारे गए थे और 122 लोग घायल हुए थे। यह हमला तरावीह की नमाज के ठीक बाद हुआ, जब कई मरीज अस्पताल की मस्जिद से बाहर निकल रहे थे। भारत ने इस घटना को 'कायरतापूर्ण' और 'अविवेकपूर्ण' हमला करार दिया।
पाकिस्तान की सफाई को भारत ने नकारा
भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की बड़ी-बड़ी बातें करता है, लेकिन हकीकत में वह हमेशा निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाता है। 1971 के 'ऑपरेशन सर्चलाइट' का जिक्र करते हुए भारत ने कहा कि उस समय पाकिस्तानी सेना ने बड़े पैमाने पर नरसंहार और यौन उत्पीड़न को अंजाम दिया था। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने काबुल अस्पताल को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है। इस्लामाबाद का दावा है कि उसने केवल आतंकी ठिकानों और सैन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया था, किसी अस्पताल या नागरिक प्रतिष्ठान को नहीं। बहरहाल, इस तीखी बहस के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक टकराव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है।