नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के कारण होरमुज जलडमरूमध्य वर्तमान में दोहरे अवरोधों का सामना कर रहा है। यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग वैश्विक ईंधन आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता था लेकिन फरवरी में संयुक्त अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान ने इसे बंद कर दिया था। बाद में अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर अपना अवरोध घोषित कर दिया। आठ महीने से अधिक समय से जारी इस तनाव के बीच ईरान ने अब कुछ देशों के वाणिज्यिक जहाजों को प्रतिबंधों से छूट देने का फैसला लिया है। यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छूट से प्रभावित देशों की ऊर्जा आपूर्ति में राहत मिलने की संभावना है।
चार देशों के जहाजों को मिली विशेष छूट
ईरान ने भारत चीन इराक और कतर के जहाजों को होरमुज जलडमरूमध्य से निर्बाध आवागमन की अनुमति दे दी है। इन देशों के जहाज बिना किसी रुकावट के गुजर रहे हैं और अमेरिकी पक्ष भी उन्हें रोक नहीं रहा है। यह छूट उन देशों को दी गई है जिनके साथ ईरान के विशिष्ट हित और संबंध जुड़े हुए हैं। वैश्विक स्तर पर होरमुज की नाकाबंदी से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई थी इसलिए चयनित देशों को राहत देना ईरान की रणनीतिक चाल माना जा रहा है। इससे इन देशों की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने से बची रहेंगी। छूट की घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी आकर्षित किया है।
ईरानी अधिकारी का बयान और छूट का आधार
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मोकद्दम ने ईरानी छात्रों के समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान में भारत चीन इराक और कतर को होरमुज जलडमरूमध्य में पारगमन प्रतिबंधों से छूट दी गई है। मोकद्दम ने बताया कि इन देशों के जहाज स्वतंत्र रूप से गुजर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये छूट विशिष्ट विचारों और आपसी हितों पर आधारित हैं। अधिकारी के अनुसार यह व्यवस्था दोनों पक्षों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। बयान से स्पष्ट है कि ईरान अपनी रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर यह निर्णय ले रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव की पृष्ठभूमि
क्षेत्र में तनाव फरवरी के अंत में हुए संयुक्त अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद बढ़ा था जिसके जवाब में ईरान ने होरमुज को बंद करने का कदम उठाया। इसके बाद अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर अपना अवरोध लगा दिया। नवंबर की शुरुआत में अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर फिर हमला किए जाने से तनाव और बढ़ गया। आठ महीने से अधिक समय तक चली इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया। ऐसे में चयनित देशों को छूट देना ईरान की ओर से तनाव कम करने या अपने हित साधने की कोशिश माना जा रहा है। पूरी स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
आपसी हित और बदले में ईरान की अपेक्षाएं
ईरानी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि छूट विशिष्ट विचारों और पारस्परिक हितों पर आधारित है। हालांकि उन्होंने विस्तार से नहीं बताया कि बदले में क्या अपेक्षा की जा रही है लेकिन अनुमान है कि ऊर्जा व्यापार कूटनीतिक समर्थन या अन्य क्षेत्रों में सहयोग की अपेक्षा हो सकती है। भारत और चीन जैसे देशों के साथ ईरान के लंबे समय से आर्थिक और ऊर्जा संबंधी संबंध रहे हैं। इराक और कतर भी क्षेत्रीय समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छूट देकर ईरान इन देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। आपसी हितों के आधार पर यह व्यवस्था आगे भी जारी रह सकती है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारत के लिए महत्व
होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ईंधन आपूर्ति का अहम मार्ग रहा है इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर विश्व बाजार पर पड़ता है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए इस मार्ग से निर्बाध आवागमन बेहद महत्वपूर्ण है। छूट मिलने से भारतीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहेगी और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता बनी रहेगी। चीन सहित अन्य देशों को भी इसी तरह का लाभ मिल रहा है। यह व्यवस्था तनाव के बावजूद सीमित व्यापारिक गतिविधियों को जारी रखने में सहायक सिद्ध हो रही है। भारत के लिए यह विकास सकारात्मक संकेत है लेकिन क्षेत्रीय स्थिति पर नजर बनाए रखना आवश्यक होगा।