अहमदाबाद/पुरी। भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा गुरुवार को देशभर में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ शुरू हो गई। गुजरात के अहमदाबाद और ओडिशा के पुरी में लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बनने के लिए पहुंचे हैं। अहमदाबाद में सुबह पारंपरिक विधि-विधान के साथ रथयात्रा का शुभारंभ हुआ, जबकि पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को भव्य रथों पर विराजमान कर गुंडिचा मंदिर के लिए रवाना करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
अहमदाबाद में सुबह मंगला आरती से हुई शुरुआत
अहमदाबाद के जामालपुर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में सुबह करीब 4 बजे मंगला आरती का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपने परिवार के साथ शामिल हुए और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की।इसके बाद सुबह करीब 7 बजे भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के रथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मंदिर परिसर से निकले। रथयात्रा के दौरान पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और जय जगन्नाथ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने निभाई परंपरा
रथयात्रा शुरू होने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने परंपरा के अनुसार सोने की झाड़ू से रथ के आगे सड़क की सफाई की। इस रस्म को विनम्रता, सेवा और समानता का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना कर रथयात्रा को आगे बढ़ाया गया।
पुरी में भी निकलेगी भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा
ओडिशा के पुरी में भी भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को उनके-अपने भव्य रथों पर विराजमान कराया जाएगा।इसके बाद पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव पारंपरिक 'छेरा पहंरा' रस्म निभाते हुए सोने की झाड़ू से रथों के आगे सफाई करेंगे। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं।
शाम को गुंडिचा मंदिर के लिए रवाना होंगे रथ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शाम करीब 4 बजे श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को खींचते हुए लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर तक लेकर जाएंगे। यह यात्रा जगन्नाथ संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है और इसमें देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
बारिश के बावजूद नहीं कम हुआ श्रद्धालुओं का उत्साह
पुरी में सुबह से बीच-बीच में बारिश हो रही है, लेकिन इसका श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथयात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
जगन्नाथ रथयात्रा का धार्मिक महत्व
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा भारत के सबसे बड़े और प्राचीन धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर अपने मौसी घर यानी गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर निकलते हैं। मान्यता है कि इस पावन रथयात्रा में शामिल होने या भगवान के रथ के दर्शन करने मात्र से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।