प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह लगभग 26,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। रेलवे, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, हरित परिवहन और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाएं इस दौरे का हिस्सा होंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 17 जुलाई का दौरा उत्तर भारत के विकास के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान प्रधानमंत्री कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। इनमें देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, आधुनिक अस्पताल, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे स्टेशन पुनर्विकास, नई रेल लाइनें और एक्सप्रेसवे जैसी कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को नया बल मिलेगा।
हरियाणा को 14,700 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात
प्रधानमंत्री सबसे पहले हरियाणा के जींद पहुंचेंगे, जहां वह करीब 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इस दौरान राज्य में बुनियादी ढांचे, परिवहन और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई योजनाओं की शुरुआत होगी।
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी
दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण जींद-सोनीपत के बीच चलने वाली देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन होगी। प्रधानमंत्री इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल तकनीक पर आधारित है और शून्य कार्बन उत्सर्जन करेगी। हाइड्रोजन फ्यूल सेल से संचालित यह ट्रेन केवल जलवाष्प उत्सर्जित करेगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी। इसे दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल माना जा रहा है।
कुरुक्षेत्र में बनेगा सिख संग्रहालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुरुक्षेत्र में सिख संग्रहालय की आधारशिला भी रखेंगे। यह संग्रहालय सिख गुरुओं की शिक्षाओं, उनके साहस, बलिदान और भारतीय संस्कृति में सिख समुदाय के योगदान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित करेगा। संग्रहालय का उद्देश्य नई पीढ़ी को सिख इतिहास और विरासत से जोड़ना है।
चंडीगढ़ में स्वास्थ्य और शिक्षा को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री 6,600 करोड़ रुपये से अधिक की स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इस दौरान वे पीजीआईएमईआर (PGIMER) में एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर का उद्घाटन करेंगे। साथ ही प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत 150 बेड वाले क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला रखी जाएगी। शिक्षा क्षेत्र में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज और गवर्नमेंट कॉलेज सेक्टर-46 में नए छात्रावासों तथा अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की शुरुआत भी होगी।
सड़क संपर्क मजबूत करने के लिए कई बड़ी परियोजनाएं
प्रधानमंत्री मोहाली आईटी सिटी से कुराली तक 6 लेन ग्रीनफील्ड हाईवे का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा जीरकपुर ग्रीनफील्ड बाईपास और अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड राजमार्ग (NH-205A) के पीआर-7 कॉरिडोर की आधारशिला भी रखी जाएगी। इन परियोजनाओं से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा तथा यात्रा का समय कम होगा।
पंजाब में रेल और सड़क परियोजनाओं को मिलेगी नई गति
पंजाब के जालंधर में प्रधानमंत्री 5,470 करोड़ रुपये से अधिक की रेल और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। वे अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देश के 20 राज्यों के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे। करीब 1,570 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इन स्टेशनों में आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ स्थानीय संस्कृति और विरासत की झलक भी दिखाई देगी।
नई रेल लाइन और दो नई ट्रेनों को दिखाएंगे हरी झंडी
प्रधानमंत्री लगभग 830 करोड़ रुपये की लागत से तैयार दौलतपुर चौक-करतोली नई रेल लाइन का उद्घाटन करेंगे। इससे पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। इसके अलावा वे करतोली-अंबाला रेल सेवा और अमृतसर (छेहर्टा)-वाराणसी रेल सेवा को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
एक्सप्रेसवे और बाईपास परियोजनाओं का शुभारंभ
प्रधानमंत्री 3,070 करोड़ रुपये से अधिक की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के 30.9 किलोमीटर लंबे पैकेज-6 का उद्घाटन तथा दक्षिणी लुधियाना ग्रीनफील्ड बाईपास की आधारशिला प्रमुख है। इन परियोजनाओं से यात्रा का समय कम होगा, माल परिवहन तेज होगा और क्षेत्रीय व्यापार एवं आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
क्षेत्रीय विकास और हरित परिवहन को मिलेगा बढ़ावा
प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल नई परियोजनाओं के उद्घाटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उत्तर भारत में आधुनिक परिवहन, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, उच्च शिक्षा, रेल और सड़क संपर्क तथा पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देना भी है। पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत भारत के स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।