पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी विभागों में ठेका (टेंडर) प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और जवाबदेह बनाने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सचिवालय की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत अब किसी भी सरकारी विभाग, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या अन्य सरकारी संस्था को किसी एजेंसी का अनुबंध बार-बार बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक विभाग को मौजूदा अनुबंध की अवधि समाप्त होने से कम से कम तीन महीने पहले नई निविदा (टेंडर) जारी करने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसका उद्देश्य सरकारी खरीद प्रणाली में पारदर्शिता लाना, अधिक से अधिक एजेंसियों को प्रतिस्पर्धा का अवसर देना, वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाना और समयबद्ध तरीके से सरकारी कार्यों को पूरा करना है। नए नियमों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी।
बार-बार अनुबंध बढ़ाने की प्रवृत्ति पर लगेगी रोक
नए दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि कई सरकारी विभाग समय पर नई निविदा जारी करने के बजाय मौजूदा एजेंसियों के अनुबंध का विस्तार करते रहे हैं। कुछ मामलों में आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किए बिना ही अनुबंध की अवधि बढ़ा दी जाती थी। सरकार ने इसे रोकने के लिए सख्त व्यवस्था लागू की है।
तीन महीने पहले शुरू करनी होगी नई टेंडर प्रक्रिया
सरकार ने सभी प्रोक्योरिंग अथॉरिटी (Procurement Authority) को निर्देश दिया है कि किसी भी मौजूदा अनुबंध की अवधि समाप्त होने से कम से कम तीन महीने पहले नई एजेंसी के चयन के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करना अनिवार्य होगा। इससे नई एजेंसी का चयन समय पर हो सकेगा और सरकारी कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
हर महीने होगी अनुबंधों की समीक्षा
नई व्यवस्था के तहत सभी विभागाध्यक्ष अपने विभाग में चल रहे अनुबंधों की हर महीने समीक्षा करेंगे। साथ ही इन अनुबंधों की अद्यतन सूची संबंधित वित्त विभाग के साथ साझा की जाएगी, ताकि समयसीमा का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
बिना अनुमति नहीं बढ़ेगा कोई अनुबंध
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी परिस्थिति में मौजूदा अनुबंध के विस्तार या नवीनीकरण के प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यदि समय पर नई निविदा जारी नहीं की गई या बिना अनुमति किसी एजेंसी का अनुबंध बढ़ाया गया, तो इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जाएगा।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
नए नियमों के अनुसार यदि किसी अधिकारी की लापरवाही के कारण समय पर टेंडर जारी नहीं होता या नियमों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने विभागाध्यक्षों और अधीनस्थ कार्यालयों के प्रमुखों को इन निर्देशों के पालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया है।
सभी सरकारी संस्थाओं पर लागू होंगे नए नियम
नई नीति केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं रहेगी। इसे स्थानीय निकायों, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), वैधानिक निकायों और अन्य सरकारी संस्थाओं पर भी समान रूप से लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पूरे सरकारी तंत्र में एक समान, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी खरीद प्रणाली विकसित करना है।
सरकारी खरीद प्रणाली में आएगी पारदर्शिता
विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से सरकारी ठेकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, अधिक एजेंसियों को अवसर मिलेगा और सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही बार-बार कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे सरकारी खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।