रांची: झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों और हेमंत सोरेन सरकार के बीच गतिरोध कायम है। रविवार को मोराबादी के सरकारी गेस्ट हाउस में हुई बातचीत विफल होने के बाद, छात्रों ने सोमवार को रांची में विधानसभा घेराव (विधानसभा अभियान) करने का फैसला किया है। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन को राज्य के सभी जिलों के छात्रों ने अपना नैतिक समर्थन दिया है।
सरकार और छात्रों के बीच क्यों फंसा पेंच?
हेमंत सोरेन सरकार का दावा है कि छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं और तीन परीक्षाएं रद्द भी कर दी गई हैं। हालांकि, मुख्य विवाद भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली की सीबीआई (CBI) जांच को लेकर है। राज्य सरकार इस मामले की जांच सीबीआई से कराने को तैयार नहीं है, जबकि छात्र निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से ही जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं।
छात्रों की 3 प्रमुख मांगें
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एक सप्ताह से अधिक समय से धरना दे रहे छात्रों ने सरकार के सामने तीन मुख्य शर्तें रखी हैं:
1. भर्ती धांधली की सीबीआई और ईडी (ED) से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता आने तक परीक्षाएं स्थगित रखी जाएं।
3. पूरी व्यवस्था में सुधार कर योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिया जाए।
पुराने से नए विधानसभा भवन तक शांतिपूर्ण मार्च
तीन दौर की वार्ता विफल होने के बाद छात्र नेता संजय मेहता ने बताया कि सोमवार को पुराने विधानसभा भवन से नए विधानसभा भवन तक शांतिपूर्ण जुलूस निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक उनकी शत-प्रतिशत मांगें नहीं मानी हैं। जब तक भर्ती प्रणाली में सुधार और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।