राष्ट्रीय राजधानी में चल रही सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट के तहत निर्मित होने वाला कर्तव्य भवन सितंबर 2026 तक तैयार हो जाएगा। यह परियोजना देश के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
चरणबद्ध निर्माण कार्य की विस्तृत समयरेखा
सरकार द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। छठे और सातवें भवन का निर्माण मार्च 2027 तक पूर्ण होने की संभावना है। इसके बाद आठवें और नौवें भवन को दिसंबर 2027 तक तैयार किया जाएगा, जबकि चौथे और पांचवें भवन के निर्माण के साथ अप्रैल 2028 तक पूरी परियोजना को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
ऐतिहासिक भवनों का संरक्षण और पुनरुपयोग
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण भी है। नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक जैसे ऐतिहासिक भवनों का पुनरुद्धार कर उन्हें ‘युगे युगेन भारत’ संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। यह पहल भारत के प्रशासनिक इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को उससे जोड़ने का कार्य करेगी।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष उपाय
निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए सरकार द्वारा कई प्रभावी उपाय किए गए हैं। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण जाल लगाए गए हैं, जल छिड़काव किया जा रहा है और सामग्री के परिवहन को ढककर ले जाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मलबे के निपटान के लिए अधिकृत संयंत्रों का उपयोग किया जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान प्रदूषण का स्तर नियंत्रित रहे।
निरीक्षण और निगरानी की सख्त व्यवस्था
प्रदूषण नियंत्रण और निर्माण गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विभिन्न एजेंसियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। इसके साथ ही एंटी-स्मॉग गन और हरित आवरण जैसे उपायों का भी प्रयोग किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
नई प्रशासनिक व्यवस्था की नींव
इस परियोजना के तहत पहले भवन का उद्घाटन पहले ही किया जा चुका है, जिससे पुराने प्रशासनिक भवनों को खाली करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लगभग एक सदी से प्रशासनिक केंद्र रहे इन भवनों के स्थान पर अब आधुनिक और अधिक कार्यक्षम संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। यह परिवर्तन भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने का संकेत है।