श्रीनगर. कश्मीर घाटी में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है। ताजा जानकारी के अनुसार कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू हो गई है, जिसके चलते महत्वपूर्ण मार्गों पर आवागमन बाधित हो गया है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी ऐसे ही हालात बने रहने की संभावना जताई है।
बर्फबारी से प्रमुख मार्गों पर यातायात ठप
घाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हो रही लगातार बर्फबारी के कारण श्रीनगर-लद्दाख मार्ग सहित कई अहम सड़कों को बंद करना पड़ा है। जोजिला, मणिमर्ग और राजदान टॉप जैसे क्षेत्रों में भारी बर्फ जमने से सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही को रोकना आवश्यक हो गया है। प्रशासन ने यात्रियों को इन मार्गों से दूर रहने की सलाह दी है।
मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी
श्रीनगर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने जानकारी दी है कि 17 से 19 अप्रैल के बीच कश्मीर में मौसम सामान्यतः बादल छाए रहने वाला रहेगा। इस दौरान हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। सुबह और शाम के समय यह गतिविधियां अधिक सक्रिय रह सकती हैं, जिससे दृश्यता और आवागमन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
तेज हवाओं और ओलावृष्टि की संभावना
मौसम विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि इन दिनों के दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है, जिससे फसलों और खुले में रखी वस्तुओं को नुकसान पहुंच सकता है। यह स्थिति किसानों और आम नागरिकों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
20 अप्रैल के बाद मौसम में सुधार के संकेत
हालांकि राहत की बात यह है कि 20 से 24 अप्रैल के बीच मौसम में सुधार होने की संभावना जताई गई है। इस अवधि में अधिकांश क्षेत्रों में सूखे हालात बने रहेंगे और बारिश की गतिविधियां कम हो जाएंगी। इससे सामान्य जनजीवन के साथ-साथ यातायात व्यवस्था भी धीरे-धीरे पटरी पर लौटने की उम्मीद है।
किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी
मौसम विभाग ने किसानों को विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह दी है। 17 से 19 अप्रैल के बीच संभावित बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि को देखते हुए खेती से जुड़े कार्यों को फिलहाल स्थगित करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा 25 और 26 अप्रैल को भी दोपहर के समय हल्की बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है, जिससे कृषि गतिविधियों पर प्रभाव पड़ सकता है।