देश में आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच उर्वरकों की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरी है। इस बार खरीफ के दौरान लगभग 3.90 करोड़ टन उर्वरकों की आवश्यकता अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। वर्तमान में उपलब्ध भंडार 1.80 करोड़ टन के आसपास है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में अतिरिक्त 2.10 करोड़ टन उर्वरक की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है।
वैश्विक संकट से प्रभावित आपूर्ति तंत्र
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार को अस्थिर बना दिया है। इस अस्थिरता का सीधा प्रभाव आपूर्ति श्रृंखला और कीमतों पर पड़ रहा है। हालांकि सरकार ने यह आश्वासन दिया है कि किसानों को फिलहाल किसी प्रकार की अतिरिक्त कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।
सरकार की बहुआयामी रणनीति
उर्वरक की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने कई देशों के साथ सक्रिय संवाद शुरू किया है। रूस, मोरक्को, अल्जीरिया, टोगो, मलेशिया, फिनलैंड, कनाडा और जोर्डन जैसे देशों से यूरिया, डीएपी, सल्फर और अमोनिया की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उर्वरक विभाग अन्य मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित कर वैश्विक आपूर्ति को सुदृढ़ करने में जुटा हुआ है।
घरेलू उत्पादन पर गैस आपूर्ति का असर
देश में उर्वरक उत्पादन पर गैस आपूर्ति में कमी का भी प्रभाव पड़ा है। हाल ही में उर्वरक संयंत्रों को गैस की आपूर्ति घटाकर 60 प्रतिशत कर दी गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 80 प्रतिशत किया गया है। इसके परिणामस्वरूप उत्पादन में होने वाली संभावित कमी कुछ हद तक कम हुई है, किन्तु यह स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। गैस की सीमित उपलब्धता घरेलू उत्पादन क्षमता के पूर्ण उपयोग में बाधा बन रही है।
आयात और वैकल्पिक उपायों पर जोर
सरकार ने उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। विभिन्न देशों से लाखों टन यूरिया और डीएपी खरीदने के लिए समझौते किए गए हैं। साथ ही समुद्री मार्गों के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि आपूर्ति बाधित न हो। हालांकि कुछ समझौतों की आपूर्ति को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, जो स्थिति को और जटिल बना सकती है।
कृषि क्षेत्र के लिए संतुलन बनाए रखने की चुनौती
वर्तमान परिदृश्य में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराए। खरीफ सीजन देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, ऐसे में उर्वरक की कमी उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए आवश्यक है कि आपूर्ति और उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखा जाए और संभावित संकट से समय रहते निपटा जाए।