नई दिल्ली. साल 2026 में लगने वाला दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को होगा, जिसे खगोल विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा और सूर्य के चारों ओर अग्नि की अंगूठी जैसा दृश्य दिखाई देगा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह ग्रहण सामान्य सूर्य ग्रहणों की तुलना में अधिक समय तक प्रभावी रहेगा, जिससे इसकी विशेषता और बढ़ गई है। दुनिया भर के खगोल प्रेमी इस अद्भुत घटना को देखने के लिए अभी से उत्साहित दिखाई दे रहे हैं।
6 मिनट 23 सेकंड तक रहेगा ग्रहण का प्रभाव
आमतौर पर पूर्ण सूर्य ग्रहण की अवधि तीन मिनट के आसपास मानी जाती है, लेकिन 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह ग्रहण करीब 6 मिनट 23 सेकंड तक प्रभावी रहेगा। इतनी लंबी अवधि के कारण इसे इस दशक की सबसे चर्चित खगोलीय घटनाओं में शामिल किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दौरान आकाश में असाधारण दृश्य देखने को मिलेगा और कई देशों में दिन के समय अचानक अंधेरे जैसी स्थिति बन सकती है। यही वजह है कि इसे “सदी के सबसे लंबे सूर्य ग्रहणों” में गिना जा रहा है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में घटित होगा। ग्रहण को लेकर ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर मौसम, राजनीतिक गतिविधियों और आर्थिक परिस्थितियों पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। ऐसे में मंदिरों के पट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने जैसी परंपराएं लागू नहीं होंगी।
भारत में नहीं दिखेगा यह सूर्य ग्रहण
भारत के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह वलयाकार सूर्य ग्रहण भारतीय आकाश में दिखाई नहीं देगा। इसी कारण यहां धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष प्रभाव नहीं माना जाएगा। हालांकि तकनीक के इस दौर में लोग इसे लाइव स्ट्रीमिंग और अंतरराष्ट्रीय स्पेस एजेंसियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से देख सकेंगे। नासा सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस दुर्लभ खगोलीय घटना का सीधा प्रसारण करने की तैयारी कर रही हैं।
इन देशों में दिखाई देगा अद्भुत दृश्य
यह सूर्य ग्रहण यूरोप के कई देशों, कनाडा, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन, रूस के उत्तर-पूर्वी हिस्सों और आर्कटिक क्षेत्रों में साफ तौर पर देखा जा सकेगा। अटलांटिक महासागर के ऊपर भी इसका दृश्य बेहद आकर्षक रहने की संभावना है। जिन क्षेत्रों में यह दिखाई देगा, वहां वैज्ञानिक अध्ययन और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं। कई देशों में इस दौरान पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है।
ग्रहण के समय और वैज्ञानिक महत्व को लेकर बढ़ी उत्सुकता
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 9:04 बजे शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे तक प्रभावी रहेगा। इतनी लंबी अवधि और दुर्लभ स्थिति के कारण वैज्ञानिक इसे पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मान रहे हैं। यह ग्रहण अंतरिक्ष अनुसंधान और खगोलीय अध्ययन के लिए नई जानकारियां उपलब्ध करा सकता है, जिससे भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।